आज है त्रयोदशी तिथि, भगवान शिव की पूजा का है यह है मुहूर्त, जानियें
जैसा कि हम जानते है कि हर माह कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विशेष महत्त्व माना गया है। वहीं, हम सभी जानते है कि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान शिव की खास पूजा-अर्चना सभी मंदिरों एवं घरों में जमकर की जाती है।
सभी मनोकामनाएं होती है पूर्ण
क्या आपको ये पता है कि इस दिन इनकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में कभी हमसे पूजा में गलती हो जाती है। तो उस पूजा में हुए गलती के निवारण के लिए हम प्रदोष व्रत रखकर छुटकारा पा सकते हैं। जहां भगवान हमारी गलती को माफ किया करते है। तो आज हमको बताएंगे कि प्रदोष व्रत में पूजा करने के दौरान किस बात का ध्यान रखना चाहिए। जिससे कि हमारी सारी बाधाएं खत्म हो जाए और जीवन में हमेशा खुशहाली बनीं रहे।
यह है पूजा का मुहूर्त
जानकारी के लिए बता दें कि दिनांक 21 नवंबर 2022 दिन सोमवार को प्रदोष व्रत पड़ रहा है। इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत भी कहते हैं। आपको बता दें कि सोम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त- सुबह 10:07 से लेकर अगले दिन 08:49 मिनट तक रहेगा। जहां सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त (शाम)- शाम 05:25 मिनट से लेकर रात 08:06 मिनट तक रहेगा।
सच्चे मन से करें पूजा
दरअसल, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव माता पार्वती का विधिवत पूजा करें। इसी दिन सच्चे मन से इनकी पूजा करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है। जहां जल्दी ही आपकी मनोकामना भी पूर्ण होती है। आपको बता दें प्रदोष काल सूर्यास्त समय को कहा जाता है। प्रदोष काल के दिन सूर्यास्त के समय भगवान शिव की पूजा विशेष तौर से करनी चाहिए। इससे आपके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। वहीं, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें भगवान शिव माता पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
भगवान शिव को अर्पित करें ये चीज
फिर इसके बाद भगवान शिव की पूजा में सफेद चंदन,गंगाजल,धूप, अगरबत्ती,अक्षत लें भगवान शिव को अर्पित कर दें। कोशिश करें कि इस दिन निर्जला व्रत रखें अगर नहीं रख सकते हैं तो आप फल का सेवन कर सकते है। वहीं, भगवान शिव को जल कच्चा दूध अर्पित करें और ऊँ नम: शिवाय का 108 बार जाप करें। एक बात जरूर ध्यान रखें कि पूजा के दौरान ध्यान रहे कि आपका मुख उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। जो एक तरह से शुभ होता है।

