भगवान् शिव के हर श्रृंगार के पीछे जीवन का बड़ा रहस्य छिपा हुआ है
हिन्दू धर्म के अनुसार शिव जी को सभी देवताओ में से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। तभी तो उन्हें त्रिदेवो का देव कहते है। अब यूँ तो भगवान् शिव के कई नाम है, लेकिन आज हम भगवान् शिव के श्रृंगार के बारे में कुछ खास बातें करने वाले है। जी हां भगवान् शिव के हर श्रृंगार के पीछे जीवन का बड़ा रहस्य छिपा हुआ है। सबसे पहले हम शिव जी की तीसरी आंख की बात करेंगे। गौरतलब है कि शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इंसान की दो ऑंखें केवल सांसारिक चीजों को दर्शाती है। जब कि शिव जी की तीसरी आँख सांसारिक चीजों से परे हट कर केवल संसार को देखने का बोध कराती है। यानि अगर हम सच कहे तो शिव जी की तीसरी आंख पांच इन्द्रियों से काफी परे है। इसलिए तो उन्हें त्रयंबक भी कहा जाता है।
भगवान् शिव के हर आभूषण के पीछे छिपा है जीवन का बड़ा रहस्य..

इसके बाद अगर हम रुद्राक्ष की बात करे तो ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पति शिव जी के अश्रुओ से हुई है। इसलिए जो व्यक्ति सच्चे मन से शिव जी की आराधना करने के बाद रुद्राक्ष धारण करता है उसके तन मन में सकारात्मक ऊर्जा का वास जरूर होता है। बहरहाल अब तो आप समझ ही गए होंगे कि शिव जी के हर आभूषण के पीछे जीवन का बड़ा रहस्य छिपा हुआ है। वही अगर शिव जी के वाहन नंदी की बात करे तो उनका वाहन प्रतीक्षा का प्रतीक है। बता दे कि नंदी जी शिव जी के सबसे करीबी और खास साथी है, क्यूकि उनके अंदर गहन शीलता यानि धैर्य का गुण है। इसके साथ ही अगर हम शिव जी के त्रिशूल की बात करे तो उनका त्रिशूल मनुष्य शरीर की तीन मुख्य नाड़ियों बाई, दाहिनी और मध्य का प्रतिबिम्ब माना जाता है।
शिव जी के बाकी आभूषण क्या कहते है आगे जरूर पढ़े..
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इससे बहत्तर हजार नाड़ियां निकलती है। गौरतलब है कि योग संस्कृति के अनुसार सर्प, कुंडलिनी का प्रतीक है। जो हमेशा शिव जी के गले का हार बन कर रहता है। बता दे कि जब पृथ्वी की विकास यात्रा करने के लिए माता गंगा का आव्हान किया गया था, तब शिव जी ने ही माता गंगा को अपनी जटाओ में स्थान दिया था। यही वजह है कि शिव जी के शीश पर गंगा माता स्थापित है। इसके इलावा शिव जी ने जो चन्द्रमा धारण किया हुआ है उसका मतलब ये है कि भले ही जीवन में कितनी भी मुश्किल स्थिति क्यों न हो लेकिन खुद को हमेशा चाँद की तरह शीत और ठंडा रखना चाहिए।
इसके साथ ही शिव जी के हाथो में मौजूद डमरू का अर्थ यह है कि इसे बजाने से आकाश, पृथ्वी और पाताल सभी एक लय में बंध जाते है। बहरहाल इसे पढ़ने के बाद तो आपको पता चल ही गया होगा कि शिव जी के हर श्रृंगार में वास्तव में जीवन का बड़ा रहस्य छिपा हुआ है।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



