बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से साथ साथ बढ़ेगी रोजगार की रफ़्तार मेक इन इंडिया के तहत उन्नत टेक्नोलॉजी से भी होगा भारत का परिचय
भारत के दौरे पर आये जापानी पीएम शिंजो आबे ने जहाँ पीएम मोदी को तोहफे में बुलेट ट्रैन जैसा उपहार दिया तो वही दुनिया के इतिहास पर दोस्ती की भी एक नई परिभाषा गढ़ते हुए दोनों देशो की दोस्ती पर कहा ‘जापान का ‘ज’ और इंडिया का ‘य’ मिल जाए तो जय बनते हैं’ और आने वाले समय में भारत और जापान की ‘जय होकर रहेगी’
इसी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिंजो आबे ने गुरुवार को अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की आधार शिला रख दी. सरकार के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1.08 लाख करोड़ आएगी और इस प्रोजेक्ट के 15 अगस्त 2022 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है. बुलेट ट्रेन की आधार शिला रखने के मौके पर शिंजो आबे ने हिंदी में नमस्कार के साथ भाषण की शुरुआत करते हुए भारतीयों का दिल जीत लिया था. उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी मंशा है कि जब वह अगली बार भारत आएं तो उनको बुलेट ट्रेन में बैठने का मौका मिले.
बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट से करीब 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा तो वही भारत में 21 किलोमीटर की सबसे लंबी टनल और 7 किलोमीटर समुद्र के नीचे से रूट रहेगा. पटरियां जमीन से 20 मीटर (करीब 70 फीट ऊपर) एलिवेटेड रहेंगी. अहमदाबाद से मुंबई की 508 किमी की रेलयात्रा में फिलहाल 7 से 8 घंटे लगते हैं. बुलेट ट्रेन चालूहोने पर 2.07 से 2.58 घंटे लगेंगे.
दुनिया के जिन देशों में फिलहाल हाई-स्पीड ट्रेन चल रही हैं उनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चाइना, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ताइवान, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. पांच साल बाद भारत का नाम भी इसमें शुमार हो जाएगा.



