कोरोना वायरस में क्या होता है R नंबर का महत्व, और क्यों है ये इतना खास?
बीते लंबे समय से चलने वाले लॉकडाउन को अब खत्म करने की बात कई देशों में की जा रही है लेकिन ये फैसला इस बात पर ज्यादा ध्यान में रखकर लिया जाएगा कि आखिर वहां कोरोना का R नंबर कितना है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला ये R नंबर क्या है और कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए इस खास नंबर की चर्चा क्यों हो रही है, तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है R नंबर का महत्व।
क्या है R नंबर का महत्व

सबसे पहले तो ये बता दें कि R मतलब ‘प्रभावी रिप्रोडक्शन नंबर।’ औसतन एक संक्रमित व्यक्ति से कितने अन्य लोगों को वायरस फैल रहा है, R नंबर इसी का सूचकांक है। वहीं ये भी बता दें कि अगर R नंबर 2 है तो कहने का मतलब ये है कि एक संक्रमित व्यक्ति से 2 नए व्यक्ति संक्रमित होंगे और फिर वे दोनों संक्रमित व्यक्ति 2-2 अन्य लोगों को संक्रमित करेंगे। फिर 4 संक्रमित 2-2 नए को संक्रमित करेंगे और इस तरह वायरस का संक्रमण काफी बड़ा रूप ले लेगा।
ऐसे में कोरोना वायरस के R नंबर का महत्व आप इस तरह से भी समझ सकते है कि अगर किसी देश में 1 से अधिक है तो कोरोना संक्रमण काफी अधिक बढ़ जाएगा। पर आपको ये भी बता दें कि कोरोना वायरस का R नंबर 1 से कम हो जाए तो महामारी धीरे-धीरे घटने लगेगी। कोरोना वायरस महामारी के शुरुआती दिनों में R नंबर 2 से 3 के बीच था। वैसे इस बीच यह भी ध्यान रखना होगा कि एक देश के हर शहर में R नंबर एक जैसा नहीं रहता।
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R नंबर वायरस की संरचना और लोगों के बर्ताव, सोशल डिस्टेंसिंग वगैरह पर निर्भर करता है। साथ ही आबादी में कितने लोग इम्यून हैं, इससे भी R नंबर पर असर पड़ता है। लॉकडाउन की वजह से R नंबर में गिरावट देखने को मिल रही है। यही वजह है कि ब्रिटेन में लॉकडाउन के बाद R नंबर 0.6 से 0.9 के बीच हो गया है। इसका मतलब है कि ब्रिटेन में महामारी घट रही है।

