सुब्रह्मण्यम स्वामी को मिलेगा उनका रुका हुआ वेतन, अदालत ने दिया आदेश
सुब्रह्मण्यन स्वामी का और भारतीय न्यायपालिका का चोली दामन का साथ रहा है। अक्सर सुब्रह्मण्यम स्वामी छोटी-छोटी बातों को लेकर कोर्ट पहुंच जाया करते हैं। कभी की किसी याचिका को लेकर तो कभी राम मंदिर से जुड़े किसी मुद्दे को लेकर। अक्सर स्वामी के अदालती मामलों पर फैसले आते रहते हैं। हाल ही में साकेत जिले की एक अदालत ने दिल्ली आईआईटी को आदेश दिया है कि 8% वार्षिक ब्याज की दर से स्वामी जी के रुके हुए वेतन को फौरन लौटाया जाए।
राजनीति में आने से पहले भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दिल्ली आईआईटी में 1969 से लेकर 1972 तक 3 वर्ष अर्थशास्त्र पढ़ाया था। मगर संस्थान से विवाद हो जाने के कारण उन्हें 1972 में निकाल दिया गया था। जिसके बाद यह मामला अदालत में गया था। 1991 में स्वामी जी को फिर से संस्थान में बहाल किया गया। मगर 1969 से लेकर 1972 तक का सुब्रह्मण्यम स्वामी का वेतन संस्थान द्वारा रोक दिया गया था। जिसके बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
साकेत जिला अदालत की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गीता गोयल ने संस्थान को 8% वार्षिक ब्याज की दर से प्रणाम स्वामी को उनकी रकम लौटाने का आदेश दिया है। यह रकम 40लाख के लगभग है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी को उनकी राजनीति के चलते संस्थान से हटाया गया था शुभम स्वामी ने अभी बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस मामले में भी दखल दिया था और दिल्ली आईआईटी को कोर्ट के बाहर समझौता करने के लिए कहा गया था। मगर दिल्ली आईआईटी संस्थान इस पर राजी नहीं हुआ।
सुब्रह्मण्यम स्वामी भारतीय जनता पार्टी के एक बहुत ही कद्दावर नेता माने जाते हैं और वह अर्थशास्त्र के बहुत बड़े ज्ञानी हैं। समय-समय पर वह सरकार की गलत नीतियों के कारण उसकी आलोचना करने से भी पीछे नहीं हटते। वह अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहते हैं।

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