कन्हैया कुमार पर फैसला लेने के लिए दिल्ली सरकार को 23 जुलाई तक का समय
जेएनयू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार की मुसीबतें एक बार फिर से बढ़ सकती हैं। मगर उससे पहले दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार कन्हैया कुमार के सामने ढाल बनकर खड़ी है। दिल्ली की एक अदालत ने कन्हैया कुमार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए अनुमति देने के विषय पर दिल्ली सरकार को निर्णय लेने के लिए 23 जुलाई तक का समय दिया है। पहले सरकार ने कहा था कि निर्णय लेने के लिए और पूरे विषय की जांच के लिए उन्हें 1 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।
मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शेरावत ने आम आदमी पार्टी को 23 जुलाई तक का समय देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार इस तिथि तक कन्हैया कुमार पर मुकदमा चलाने की अनुमति प्रदान करें। इसके पहले 14 जनवरी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जिस पर विशेष अदालत ने कहा था कि बिना दिल्ली सरकार की अनुमति के यह चार्जशीट कैसे दाखिल कर दी गई। इसके लिए पहले दिल्ली सरकार की अनुमति की आवश्यकता है। 5 फरवरी से ही यह मामला लंबित है और अब तक दिल्ली सरकार ने इस पर यानी कि कन्हैया कुमार पर मुकदमा चलाने की कोई भी अनुमति नहीं प्रदान और इसके लिए उन्होंने 1 महीने का समय मांगा था।
दरअसल बेगूसराय से लोकसभा चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार पर आरोप है कि जब वह दिल्ली के जेएनयू विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष थे तब उनके साथी छात्रों उमर खालिद शहला राशिद के साथ अन्य कश्मीरी छात्रों ने 9 फरवरी 2016 को अफजल गुरु के समर्थन में और भारत के विरोध में नारे लगाए थे। जिसके बाद हुई जांच में कन्हैया कुमार को इन नारों और लोगों का समर्थन करने का दोषी पाया गया था। इस घटना में जेएनयू में पढ़ रहे हैं कश्मीर के छात्रों के साथ साथ बाहर बाहरी भी थे। जिनका 1400 पन्नो की चार्जशीट में जिक्र किया गया है।

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