असम नागरिकता विवाद पर कविता लिखने के कारण असम पुलिस ने 10 लोगों पर दर्ज की एफआईआर
पिछले कुछ समय से असम नागरिकता विवाद काफी चर्चाओं में है। असम में रह रहे नागरिकों में से अवैध नागरिकों को पहचान करने के लिए असम की सरकार हर लगातार प्रयासरत है। ऐसे में इस मामले पर उकसाने वाले लोगों के खिलाफ भी पुलिस सख्त नजर आ रही है। हाल ही में नागरिकता विवाद पर कविता लिखने वाले 10 लोगों के खिलाफ असम पुलिस ने एफ आई आर दर्ज की है। जिन 10 लोगों ने इस पर कविता लिखी है वह सभी बंगाली मूल के मुस्लिम और एक्टिविस्ट हैं।
सदमे से लोग कर रहे हैं आत्महत्या
दरअसल असम में अवैध रूप से रह रहे अप्रवासी लोगों की पहचान करने के लिए वहां लोगों को भारतीय नागरिकता सिद्ध करने का अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि लगभग 40 लाख लोग भारतीय नागरिकता से बेदखल कर दिए जाएंगे। क्योंकि यह लोग अवैध रूप से 1971 के बांग्लादेश निर्माण के समय भारत में आकर बस गए थे। ऐसे में कई लोग अपनी नागरिकता जाने के डर से सदमे से आत्महत्या भी कर ले रहे हैं। 88 वर्षीय अशरफ अली ने घर से बाहर खाना खाने का बहाना बनाकर जहर खाकर आत्महत्या कर दी। उनका नाम पहले भारतीय नागरिकता में शामिल लोगों की लिस्ट में था। मगर दोबारा उनके पड़ोसी ने फिर से नागरिकता साबित करने की शिकायत कर दी। जिसके बाद उन्हें दोबारा नागरिकता साबित करने के लिए बुलाया गया। जिस कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।
कविता लिखने वालों ने पूछा सवाल
गुवाहाटी सेंट्रल जेल के डीसीपी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि असम नागरिकता विवाद पर कविता लिखने के कारण कुछ लोगों पर आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन लोगों की जांच पड़ताल की जा रही है। वहीं कविता लिखने वाले बंगाली मुसलमानों और एक्टिविस्टों का कहना है कि क्या उन्हें नागरिकता के वास्तविक रूप पर भी कविता लिखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार इस तरह के प्रयासों को रोकने का प्रयास क्यों कर रही है?

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



