दुनिया के इस देश ने अमेरिका की सेना को घोषित किया आतंकवादी संगठन
ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद आज से नहीं हैं। ईरान और अमेरिका एक दूसरे के खिलाफ दशकों से रहे हैं। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की थी। तब ईरान के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन थे। उसके बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगा दिया था। जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे तब उन्होंने ईरान के साथ संबंधों में कुछ नरमी बरती थी। मगर जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाले हैं उन्होंने ईरान के खिलाफ हमेशा ही आक्रामक रुख अख्तियार किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान के साथ अपने संबंधों में कटुता कर ली। वह अक्सर ईरान पर परमाणु कार्यक्रमों के प्रतिबंध का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं। जिसका परिणाम हाल ही में कुछ इस प्रकार सामने आया है।
अमेरिका के द्वारा ईरानी सैनिक संगठन आईआरजीसी को आतंकी संगठन का नाम दे दिया गया है। इसी के प्रति उत्तर में ईरान ने भी उसे मध्य – पूर्व का आतंकी बताया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का मुख्य कारण यह भी है कि वह ईरान पर अनैतिक रूप से परमाणु कार्यक्रम को बढ़ाने के आरोप लगाते आ रहा है। इस दौरान ईरानी विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने अपने राष्ट्रपति से इसके संबंध में प्रतिक्रिया मांगी और तत्पश्चात् अमेरिकी सेंट्रल कमांड को ईरानी नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल द्वारा आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया।
ट्रंप का कहना है कि ईरानी सरकार रेवोल्यूशनरी गार्ड (ईरान की आई फोर्स का हिस्सा) के जरिए आतंकवादियों की मौद्रिक अपूर्ति कर आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है। इसे ध्यान में रखते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने बैंको एवं व्यवसायिक संगठनों को आईआरजीसी से लेन- देन रोकने के निर्देश दिए हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका
हमारी सेना के खिलाफ कार्रवाई की पहल करती है तो हमें मजबूरन उसकी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ेगी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



