कारगिल वीरों की कहानी को बयां करने वाली पहली ट्रेन रवाना
1999 का वह दौर जब पाकिस्तान के सैनिकों ने हमारे देश के अंदर घुसकर कारगिल में कब्जा जमा लिया था। मगर हमारे देश के वीर जवानों ने पाकिस्तानी सैनिकों को वहां से मार कर खदेड़ दिया और अपनी भूमि को वापस पा लिया। उसी जीत के उपलक्ष में हम हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस उत्सव के रूप में मनाते हैं। 2019 में 26 जुलाई को इस विजय उत्सव के 20 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस दौरान हमारे शहीदों को अन्य अन्य संगठन अपने अपने तरीके से याद कर रहे हैं। देश में कारगिल वीरों की कहानी बयां करती हुई पहली ट्रेन सोमवार को रवाना की गई। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, सांसद मीनाक्षी लेखी, रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी मौजूद रहे। काशी विश्वनाथ नाम किया ट्रेन दिल्ली से वाराणसी जाएगी।
कारगिल वीरों की कहानी को बयां करती है यह ट्रेन
एक रेल प्रवक्ता ने बताया कि विजय दिवस के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में कारगिल वीरों की कहानी और कारगिल युद्ध की कहानी को बयां करती हुई 10 ट्रेनें रवाना की जाएंगी। काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस उनमें से पहले ट्रेन है। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र मेल ,सीमांचल एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस और गोवा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस एसी ट्रेनें हैं जिन पर कारगिल युद्ध की कहानियां अंकित रहेंगी। इन ट्रेनों में बकायदा कारगिल युद्ध की कहानी को बयान करने वाले पोस्टर लगे हुए हैं। जिनको देखकर जनता हमारे देश की जवानों की शौर्य गाथा को महसूस कर पाएगी कि उन्होंने किन कठिनाइयों में कारगिल की उस विजय को हासिल किया था। जहां पर दुश्मन हमसे ज्यादा ऊंचाई पर घात लगाए बैठा हुआ था।
इस मौके पर शहीदों के परिवार के भी कुछ सदस्यों को आमंत्रित किया गया था। आने वाले समय में कारगिल युद्ध की कहानी को बयां करने वाली ट्रेनी हमारे देश में सैनिकों के सम्मान को बढ़ाने के लिए एक बहुत ही अच्छी पहल साबित हो सकती हैं। इससे देश के लोगों में सेना के प्रति सम्मान और बढ़ जाएगा।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



