लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चारा घोटाले में चलेगा आपराधिक साज़िश का केस
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (8 मई) को कहा कि उन्हें करोड़ों रुपयों के चारा घोटाले से जुड़े हर उस मामले में अलग सुनवाई का सामना करना होगा जिसमें वह आरोपी हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें अलग अलग सजा हो सकती है.
घोटाले से जुड़े 64 मामलों में से यादव छह मामलों में आरोपी हैं और एक अप्रैल 1994 से 31 जनवरी 1995 के बीच झारखंड में आने वाले चाईबासा कोषागार से 37.70 करोड़ रुपये धोखाधड़ी से निकालने से जुड़े एक मामले में पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं. उनके खिलाफ जिन अन्य मामलों को पूरा किया जाना है उसमें रांची के चाईबासा, दुमका और पटना के कोषागार से जुड़े मामले शामिल हैं.
शीर्ष अदालत ने सोमवार को देवघर कोषागार से जुड़े मामले में यादव को आरोपमुक्त करने के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त किया जहां 1991 से 1994 के बीच 250 वाउचरों और 17 फर्जी आवंटन पत्रों की मदद से 85 लाख रुपये का गबन किया गया. न्यायालय ने निचली अदालत को कार्यवाही नौ महीने के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया.
राजद प्रमुख के अलावा, इस मामले में 37 अन्य आरोपी हैं. शीर्ष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती के खिलाफ उच्च न्यायालय का आदेश भी निरस्त किया जिनके खिलाफ इसी आधार पर कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी. पीठ ने उनकी इस दलील को खारिज किया कि समान तथ्यों और परिस्थितियों वाले हर मामले की अलग सुनवाई नहीं हो सकती. पीठ ने कहा कि अपराध का तरीका समान होना इसे एक अपराध नहीं बनाता जबकि अपराध अलग अलग हैं.

