जाने आखिर कैसे वृंदा नाम की एक कन्या तुलसी का पौधा बनी, पूरी कहानी जान कर रह जायेंगे दंग
इसमें कोई दोराय नहीं कि हमारे हिन्दू धर्म में तुलसी का काफी खास महत्व है। मगर क्या आप जानते है कि आखिर तुलसी का पौधा पृथ्वी पर कैसे आया। बहरहाल आपको जान कर हैरानी होगी कि वास्तव में वृंदा नाम की एक कन्या तुलसी का पौधा बनी और फिर पृथ्वी पर आई। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान् विष्णु को तुलसी बेहद ही प्रिय है। बता दे कि पौराणिक कथाओ के अनुसार राक्षस कुल में एक कन्या का जन्म हुआ था। उसी कन्या का नाम वृंदा था। बहरहाल वृंदा बचपन से ही विष्णु जी की भक्ति में लीन रहती थी। वही जब वृंदा विवाह करने के लायक हुई, तब उसके माता पिता ने उसका विवाह समुन्द्र मंथन से पैदा हुए एक राक्षस जलंधर से कर दिया।

वृंदा से तुलसी बनने की पूरी कहानी..
गौरतलब है कि वृंदा एक पतिव्रता स्त्री थी। ऐसे में वृंदा की भक्ति और आस्था के कारण उसका पति और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया। बहरहाल अब हम आपको बताएंगे कि कैसे वृंदा नाम की कन्या तुलसी का पौधा बनी और कैसे पृथ्वी पर आई। बता दे कि वृंदा की आस्था के कारण उसका पति सभी देवी देवताओ को भी हराता चला गया। ऐसे में सभी देवता भगवान् विष्णु जी की शरण में जा पहुंचे और उनके सामने जलंधर को हराने की विनती की। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसके बाद खुद विष्णु जी ने जलंधर का रूप धारण कर लिया था। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो भगवान् विष्णु जी ने छल करके वृंदा के पतिव्रता धर्म को नष्ट कर दिया और इससे जलंधर की शक्ति भी कम होने लगी।
वृंदा नाम की कन्या ऐसे बनी तुलसी का पौधा..
बहरहाल अंत में जलंधर तो मारा गया, लेकिन जब वृंदा को विष्णु जी के छल के बारे में पता चला तो उसने विष्णु जी को पत्थर यानि शिला बनने का श्राप दे दिया। हालांकि माँ लक्ष्मी के कहने पर वृंदा ने अपना श्राप वापिस ले लिया और जलंधर के साथ ही सती हो गई। ऐसा कहा जाता है कि जब वृंदा सती हुई तब उसके शरीर की भस्म से ही एक पौधा पैदा हुआ था। जी हां इसी पौधे को विष्णु जी ने तुलसी का नाम दिया। यहाँ तक कि विष्णु जी ने खुद के एक रूप को पत्थर में समाहित करते हुए कहा कि आज से वह तुलसी के बिना कोई भी प्रसाद ग्रहण नहीं करेंगे। यही वजह है कि विष्णु जी को भोग लगाने से पहले उनके प्रसाद में तुलसी का पत्ता जरूर डाला जाता है।
इसके साथ ही विष्णु जी ने ये भी कहा कि इस पत्थर को शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा। बहरहाल अब तो आप समझ गए होंगे कि कैसे एक कन्या तुलसी का पौधा बनी और इस पृथ्वी पर आई।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



