सरवजीत सिंह से माफ़ी कब ? – एक बेगुनाह लड़के पर झूठे आरोप लगे, हटे….सब चुप!
सरवजीत सिंह से माफ़ी कब: बीते दिनों की बात सामने आ चुकी है कि सरवजीत सिंह बेगुनाह साबित हो चुके है. नहीं ! भारतीय मीडिया खासकर टीवी मीडिया को इस खबर को दिखाने की ज़रुरत नहीं दिखी या कहिये कि हिम्मत नहीं हुई, अन्य कठोर शब्दों में अंधी टीवी मीडिया के अब बूता नहीं है कि वह इस बेगुनाह और पीड़ित लड़के से माफ़ी माँग सके.
The Verdict is out. I am ACQUITTED!I wish to thank Waheguru ji for keeping His eye on me, and all of you for your…
Posted Sarvjeet Singh Bedi on Thursday, 24 October 2019
जिन्हें याद न हो , उन्हें याद दिला दें कि चार साल पहले जसलीन कौर नामक फेम की भूखी एक लड़की ने सरवजीत सिंह नामक बाइक सवार लड़के के साथ आम दिल्ली वाली तू-तड़ाक कर ली थी. इसके बाद उसने इसको रातो-रात सनसनीखेज़ मामला बनाते हुए अपनी और उसकी उसी वक़्त उस अवस्था में फोटो क्लिक कर फेसबुक पर पोस्ट डाल दी और पूरे मामले को छेड़छाड़, बदतमीज़ी का एंगल बना दिया जिससे महिला सम्मान-सुरक्षा के नाम पर उसे सहानभूति और फेम प्राप्त हुआ.
इस नौजवान से आदमी हो चुके शख्स का सरेआम मीडिया ट्रायल किया गया. सफाई के नाम पर इसके एक शब्द बोलते ही उस पर फीबत्तियां कसी गईं. सरवजीत को ‘दिल्ली का दरिंदा’ ‘बेशर्म इंसान’ आदि जैसी अपमानजनक और विद्वेषी संज्ञाओं से अंकित किया है.
उस समय इंडिया टुडे की पूजा शली ने बिना सरवजीत की बात सुने ही केवल सस्ती टीआरपी के लिए उसे बदतमीज़ कहना शुरू कर दिया. जैसे कि उन्हें एक पक्ष यानी जसलीन कौर की बात जानकर पूरा सत्य ज्ञात हो गया हो.
सरवजीत सिंह से माफ़ी कब : इन दो पत्रकारों ने किया था मीडिया ट्रायल
वहीँ टाइम्स नाउ पर तत्कालीन एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने तो अपनी तमाशबीन टोली के साथ पूरा सेटअप लगा दिया था जैसे कि स्टूडियो में ही अदालत चल रही हो. फिर क्या था ? एक महिला पैनेलिस्ट ने बस इतना कह दिया कि एक बार उसको कह तो लेने दो तो अर्नब दादा को गुस्सा आ गया और वह उस महिला पैनेलिस्ट पर आक्रामक हो गए और शाब्दिक तौर पर उनको बतौर महिला एक परवर्ट यानी विकृत लड़के का पक्ष लेने का आरोप लगा दिया मानो यह लड़के की बहन रही हो.
न अर्नब गोस्वामी न ही पूजा शली और न किसी न्यूज़पेपर, टीवी न्यूज़ चैनल या न्यूज़ वेब पोर्टल ने सरवजीत सिंह से माफ़ी माँगी. जसलीन कौर ने एक स्वार्थी अजेंडे के तहत अपना ईगो सैटिस्फाई करने के लिए, सस्ती चार-दिनी शोहरत पाने के लिए एक नोंक-झोंक को अंधी नारीवाद के चश्मे से दिखाने के लिए उसे बदतमीज़ी, हर्रास्मेंट का मामला बता दिया.
वाशिंगटन पोस्ट बग़दादी हेडलाइन विवाद डीकोडेड : आखिर जेहादी आतंकवादी का महिमामंडन कर पलटी क्यों ?
इसका दुष्परिणाम केवल सरवजीत को झेलना पड़ा जिसके लिए 4 साल कोर्ट में खुद पर लगे झूठे कलंक को हटाने की लड़ाई, हर दिन पुलिस में हाज़िरी लगाना, लो-एन्ड जॉब करना और तमाम बड़ी कंपनियों में ब्लैकलिस्टेड हो जाना और बाहर जाने के लिए भी इजाज़त मांगना एक बात रही है.
वहीँ धूर्त और स्वार्थी जसलीन सितम्बर 2015 के बाद ट्विटर पर झूठी मुहीम चला कर फरार हो गई. 15 में से 14 बार वह कोर्ट की सुनवाई ने नदारद रही जिसके पीछे कारण उसने अगली सुनवाई के लिए समन दिए जाना बताया कि वह कनाडा में पढ़ाई कर रही.
यानी जसलीन कौर की जॉब और करियर सिर्फ उसके लिए और सरवजीत सिंह के लिए सब कुछ 4 साल के लिए ब्लैकलिस्टेड हो जाना ? अब कहाँ है अरविन्द केजरीवाल से लेकर नारीवादी लोग ? पूजा शली बकवास करती थी लेकिन अब माफ़ी मांगने की हिम्मत नहीं, अर्नब दा के न्यूज़ पोर्टल रिपब्लिक वर्ल्ड ने बिना नाम के अप्रत्यक्ष रिपोर्ट पब्लिश कर दिखावा कर दिया लेकिन माफ़ी माँगना तो इनको आता भी नहीं है.
केवल टाइम्स नाउ के उस पत्रकार ने माफ़ी माँगी है जिसने अपने बॉस के कहने पर जॉब बचने या अंधेपन में यह खबर डाल दी थी.

वास्तव में हम सब ज़िम्मेमदार है बतौर समाज सरवजीत सिंह के इन 4 साल के गैर-ज़रूरी संघर्ष, झूठे आरोप के मकड़जाल और उसे बिलकुल भी सपोर्ट न करने के लिए. लेकिन गुनहगार सरवजीत सिंह से माफ़ी कब माँगेंगे ?

Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

