अयोध्या मामले में 40 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित
अयोध्या मामले में 40 दिन की सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कई सालों से बहस का मुद्दा बने रहे राम मंदिर पर फैसला आने में ज्यादा समय शेष नहीं है। लोगों की आस्था से जुड़े रहने के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों के लिए भी चुनावी माहौल का यह एक गरम मुद्दा था। उच्चतम न्यायालय अपनी तमाम कोशिशों के बाद अयोध्या मामले में इस नतीजे तक पहुंचने में सफल हो पाए। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायरमेंट के पहले राम जन्मभूमि मामले में फैसला सबके समक्ष आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों को सुनकर ही इस मामले के अंत तक पहुंच पाई है। इस मामले की गंभीरता को हम इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले 40 दिनों अर्थात लगभग 170 दिन तक इसकी सुनवाई चली। जो उच्चतम न्यायालय के इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी सुनवाई है। जिसे पांच जजों की पीठ ने अपने पास सुरक्षित रख लिया है।

इस मामले की सुनवाई की आखिरी दिन जब मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड के लोगों ने इस पर मध्यस्थता की बात पुनः रखी तो चीफ जस्टिस ने कहा “बहुत हो चुका इस मामले पर अब और सुनवाई नहीं हो सकती हम समझते हैं कि सभी पक्ष अपनी बातें कह चुके हैं आज शाम जब हम अपने दिन की कार्यवाही खत्म करेंगे उसी समय मामले की सुनवाई भी बंद कर दी जाएगी। इसके पहले रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मुस्लिम पक्ष के पक्षकारों की बात का जवाब देते हुए कहा “पैगंबर मोहम्मद ने एक बार कहा था कि किसी को मस्जिद उसी जमीन पर बनाना चाहिए जिस पर उसका मालिकाना हक हो। मुस्लिम पक्ष अयोध्या की जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं कर पाया है।” सूत्रों के हवाले से अनुमान लगाया जा रहा है कि 40 दिन की सुनवाई के बाद 17 नवंबर के पहले आस्था से जुड़े इस मसले पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आंखों का इंतजार अब खत्म हो जाएगा।
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