उत्तर प्रदेश में पड़ने वाला है नौकरियों का अकाल
उत्तर प्रदेश सरकार के युवाओं ने सरकार से जो एक उम्मीद लगा रखी थी वो टूट गयी । उत्तर प्रदेश सरकार ने अलग अलग विभागो में आने वाले नौकरियों पर अंकुश लगा दिया है । सरकारी आला कमानों का कहना है कि इस से सरकारी खर्च पर लगाम लगेगी । मगर उन्हें प्रदेश की जनता का तनिक भी ख्याल नही है कि वो पहले से ही बेरोजगारी की मार झेल रहे है नई नौकरी ना आने पर वो कहाँ जायेंगे ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि आने वाले सालों में पुलिस विभाग और मेडिकल विभाग को छोड़कर किसी भी विभाग में कोई भी नौकरियां नही दी जाएंगी । इसके पीछे प्रदेश की भाजपा सरकार का बहुत ही बचकाना तर्क है उन्होंने कहा कि ऐसा फैसला इसलिए किया गया है ताकि सरकारी खर्च में कटौती हो और सभी विभागों में पारदर्शिता बनी रहे उनका मानना है कि नई भर्तियां न होने से सभी विभागों में प्रदेश में पारदर्शिता बनी रहेगी ।
उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे के तरफ से एक नया शासनादेश जारी किया है जिसमें उल्लेखित है कि बीते दस सालों में प्रदेश की बहुत सी विभागों का कंप्यूटरीकरण हो गया है जिस से बहुत ही कम मैन पावर की आवश्यकता है । अतः जिन पदों पर कम काम है उन्हें समाप्त कर दिया जाए और उनसे जुड़े हुए लोगों को दूसरे पदों पर समायोजित कर दिया जाए ।
मेडिकल विभाग और पुलिस विभाग को छोड़कर अन्य किसी विभाग में नई नौकरियां ना निकाली जाए । आवश्यकता पड़ने पर किसी बाहरी एजेंसी से संपर्क कर लोगों को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर भर्ती कराया जाएगा । उन्होंने आगे कहा कि रोज दिए जाने वाले वेतन, तय वेतन और संविदा के आधार पर लोगों की भर्तियां नहीं होंगी । इसके साथ-साथ चतुर्थ श्रेणी की सभी भर्तियां आउट सोर्स के द्वारा कराई जाएंगी।
सरकारी समस्त सरकारी विभागों में पारदर्शिता बनाने के लिए नई नौकरियों पर भर्ती ना निकालना गले से नीचे नहीं उतर रहा है । सन् 2017 के चुनाव प्रचार में बीजेपी ने अपने अपने घोषणापत्र में कहा था कि अगले 5 सालों में 70 लाख रोजगार पैदा किए जाएंगे और इसके साथ-साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब नौकरियां नहीं होंगी तो और रोजगार के अवसर कैसे पैदा होंगे ऐसे में राज्य जनता से किये गए वादों से मुकर रही है ।

