उद्धव ठाकरे ने की धोखेबाज़ीFeatured Article News Opinion politics Trending 

राम मंदिर के नाम पर उद्धव ठाकरे ने की धोखेबाज़ी

उद्धव ठाकरे ने की धोखेबाज़ी : उद्धव ठाकरे अपनी कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा व छवि से समझौता कर के महाराष्ट्र के सीएम बन चुके है. वास्तव में महाराष्ट्र की इस बेमेल खिचड़ी गठबंधन सरकार में एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना के नेता आपस में ही द्वन्द की मुद्रा में आने वाले हैं. उद्धव ठाकरे खुद को भले ही सीएम मान लें लेकिन इस गठबंधन की गाठ की डोर सिल्वर ओक यानी एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के निवास से ही सँभाली जाती है.

उधर से विपक्ष की तरफ से फडणवीस सवाल दागेंगे तो इधर उद्धव ठाकरे जो पहली बार विधानसभा सदन में प्रवेश करेंगे, उनके सवालो का उत्तर किसी तरह दे पाएंगे.

यह सब तो होने वाली चीज़ें है लेकिन शायद ही किसी मीडिया पंडित ने इस बात पर ध्यान दिया हो कि बालासाहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे ने हिन्दू समाज को धोखा दिया है. जब राम मंदिर पर भाजपा को अध्यादेश लाने के उकसाना एवं चिढ़ाना था तो खुद को सबसे बड़ा श्रीराम भक्त बताने से उद्धव ठाकरे और उनके शिवसैनिक पीछे नहीं हटते थे लेकिन सीएम की कुर्सी के लालच वह ऐसे अंधे हुए कि चश्मे से भी दिखना व याद आना उन्हें बंद हो चुका इसलिए तो उन्होंने 23 नवंबर को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन करने की सौगंध तोड़ दी क्योंकि उन्होंने सत्ता की कुर्सी हिन्दू-विरोधी सेकुलरों के हाथों से पाई आई है तो ऐसे उन सबसे गद्दारी कैसे संभव है ?

क्या सीएम उद्धव ठाकरे देवेंद्र फडणवीस का सामना कर पाएंगे ?

 उद्धव ठाकरे ने की धोखेबाज़ी : मुलायम सिंह वाला हशल न हो जाए !

तो शिवसेना की विचारधारा को तांक पर रख के मैदे की बोरी संज्ञा जो इनके स्वर्गीय पिता बाल ठाकरे इस्तेमाल करते थे अब उन्ही की गोद में जाकर उद्धव ठाकरे बैठ गए है.इतना तो उन्हें मुलायम सिंह से ही पूछ लेना चाहिए कि जो भगवान राम का नहीं वह किसी का काम का नहीं !

तभी तो निहत्ते राम भक्तो पर कारसेवा के वक़्त गोलियां चलवाने वाले इस मियां मुलायम सिंह को उन्हें की पार्टी की अध्यक्ष की कुर्सी से अखिलेश यादव ने हटा दिया और फिर उनको हाशिये पर डाल दिया.

कैसे उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम बनकर भगवान राम के साथ छल करने का दंड भोगेंगे यह सभी लोगों को कुछ ही दिनों में सपष्ट रूप से दिख जायेगा बस समय की धूरी पर इंतज़ार करते रहिये क्योंकि महाराष्ट्र का असली पॉलिटिकल गेम तो अब शुरू हुआ है.

Related posts

Leave a Comment