क्या 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार बनेगी?
समाजवाद के महान प्रवर्तक “राम मनोहर लोहिया” से बात शुरू करता हूँ, उनका एक कहन है कि जिंदा कौमें अक्सर पाँच सालों का इंतजार नहीं किया करती। यह बात हर चुनाव की बाट जोहती। सभी राजनैतिक पार्टियों ने रणनीतिक तैयारियाँ तेज कर दी हैं, बहुतेरी राजनैतिक चर्चाओं में 2019 में अस्थायी गठबंधन या सत्ता पूर्ण बहुमत से आ पाएगी गलियारों में 7 रेसकोर्स तक पहुँचने की जद्दोजहद बढने लगी है। इस बीच रेल या बस के सफर से लेकर घर-परिवार की बैठकों में या फिर चायखानों की चर्चा में यह बात अक्सर होती हैं कि आम चुनावों में आखिरकार होगा क्या 2019 में अस्थायी गठंबधन सरकार बनेगी।
एक मजेदार तथ्य यह भी है कि हिंदुस्तान में तीन चीजों के प्रति लगाव या उत्सुकता हद से बढकर हैं। पहला है क्रिकेट, आप उत्तर से दक्षिण तक हिंदुस्तान की यात्रा कर लीजिए क्रिकेट को चाहने वाले दीवाने आपको हर ओर मिल जाएंगें। दूसरा बाॅलीवुड यानि फिल्मी क्षेत्र में आप किसी भी चर्चा या विमर्श का हिस्सा बनिए हो सकता है। बेशक कलाकारों के नाम बदल जाए पर लोग बड़े चाव से इस क्षेत्र पर बात करते हैं और तीसरा है राजनीति। रिक्शे चलाने वाला एक आम मजदूर हो या कोई धन्ना सेठ। राजनीति सभी के जीवन में सीधे तौर पर असर करती हैं चूँकि एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में सरकारें चाहिए चाहे फिर वो 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार हो या फिर पूर्ण बहुमत और उसके लिए राजनीति महत्वपूर्ण जरिया है।
हाँलाकि यह भी एक गौर करने वाली बात है कि दूसरे और तीसरे स्थान के लिए क्रिकेट और बाॅलीवुड में चाहे मार-काट चले पर पहले स्थान पर तो राजनीति ही सुशोभित होती है।
2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार बनेगी??
कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा उससे बड़ा रहस्य देश के सामने यहाँ पर ये है कि, 2019 में अस्थायी गठबंधन की सरकार बनेगी या मोदी जी के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन वापसी कर पाएगी या महागठबंधन सत्ता पर काबिज होगा। या कांग्रेस को राहल गांधी के नेतृत्व में सत्ता सुख प्राप्त होगा।
अक्सर यह तर्क एनडीए या मोदी समर्थकों द्वारा दिया जाता है, या ये कहूँ कि यह कहकर डराया जाता है कि, यदि 2019 में मोदी जी हारे। तो देश को 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार मिलेगी एवं जल्द ही देश को पुन: चुनावों का सामना करना होगा। जिसमें संसाधनों का, आर्थिक रूप से शक्ति क्षीण होगी इसलिए सत्ता में बहुमत के साथ मोदी सरकार की वापसी की बहुत जरूरत है। यह बात फेसबुक से लेकर व्हाट्सएप तक के फारवर्डेड मैसेजेज में बार-बार कही जा रही है। यहाँ पर “जोसेफ गोयेबल्स” का जिक्र लाजमी है, गोयबल्स नात्सीवाद के प्रणेता हिटलर के प्रचारमंत्री थे। उनका ही वह कुख्यात कथन है कि, “किसी झूठ को इतनी बार बोलो कि वह सच लगने लगे”!!
संभवतः दक्षिणपंथियों ने इसको पदचिन्हों के अनुसरण की सौगंध खाई है, पर यहाँ वे तथ्यों को और कमस-कम भारतीय राजनैतिक इतिहास को तो भूल ही गए हैं। उनके IT-Cell या बीजेपी की तरफ से भी अक्सर यह बात आती हैं कि 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार बनेगी।।
निष्कर्ष –
1999 के बाद से यदि लगातार हम भारत का राजनैतिक इतिहास टटोले तो हम पाएँगे कि बीते दो दशकों से गठबंधन की जितनी भी केन्द्र या राज्य सरकारें बनी है, उन्होनें इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना कार्यकाल पूरा किया है। सरकारें पूरे पाँच बरस चली हैं। हाँ यदि 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकारआये और उसका भविष्य या भाग्य क्या होगा। यह तो वक्त बताएगा पर यह बहुत आश्चर्यचकित करता है, साथ ही यह एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिहाज से बेहद खुशी की खबर है कि गठबंधन सरकारें सफल रही हैं। हाँलाकि 1967 का पहला दौर, 1977 का आपातकाल के बाद का दौर जब, 11 महीने में 2 प्रधानमंत्री, मुल्क ने देखे एवं 1996 के बाद का दौर जब 1 बरस में ही तीन प्रधानमंत्रियों का तख्तापलट हुआ। उस कुछ बरसों के समय में जरूर राजनैतिक अस्थिरता आयी पर वे एक प्राकृतिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा था।

तो इन सबसे यह बात बहुत साफ है कि यदि अस्थिर सरकार भी बनती हैं तो हमें 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार से इतना ज्यादा खौफ पालने की कोई जरूरत नहीं है। आखिर इस मुल्क में न्यायपालिका भी तो है न। और फिर जनता की अदालत से कौन बड़ा है। वैसे भी हमें यह ध्यान रखना चाहिए भारत तो स्वाभाविक रूप से ही एक गठबंधन है तमाम जातियों का, धर्मों का, समुदायों का, विचारों का है। जिस भारत के मूल में ही गठबंधन हो भला उसके लोकतंत्र को एक गठबंधन कैसे खतरा पैदा कर सकता है।
सोचिए, विचारिए एवं लोकतंत्र में अपने वोट की ताकत को पहचानिए। चाहे 2019 में अस्थायी गठबंधन सरकार आये या पूर्ण बहुमत से कोई पार्टी सत्ता पर काबिज हो आप फ़कत इतिहास को ध्यान में रखकर वर्तमान को सहेजते हुए भविष्य को संजोने का प्रयास कीजिए।
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