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मंज़िल दूर है, और रास्ता थोड़ा कच्चा, मगर पहुचना नामुमकिन नहीं

क्या किसी शख्स का किसी से मुहब्बत करना गुनाह है. नहीं, मेरी नज़रों में तो नहीं. और अब कानून की नज़रों में भी नहीं है. दरअसल पिछले साल सितम्बर में ही सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 377 के तहत समलैंगिकता को गैर अपराधिक माना था. इसका मतलब अगर कोई एक जेंडर का व्यक्ति अपने ही जेंडर के व्यक्ति से प्यार करता है या सहमति से सम्बन्ध बनता है तो संविधान की नज़रों में ये कोई गुनाह नहीं है. कहने को तो हम अपनी सोच से लिबरल बनते जा रहे हैं. वेस्टर्न…

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