वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल
“बोल की लब आजाद है तेरे” मशहूर फ़नकार और शायरी की रोमानी दुनिया के बादशाह फैज़ अहमद फैज़ की, इस कविता को नेपथ्य में रखकर वर्तमान राजनैतिक बयानबाजी के छिछले और निम्न स्तर को देखिए और मातम मनाइए। कि किस तरह विश्व की सबसे बड़े लोकतंत्र में हुक्मरानों की अभद्र, असहनशील और असभ्य भाषा, संयमित और स्वस्थ लोकतंत्र की दिन-ब-दिन धज्जियाँ उड़ाती जा रही है। वर्तमान राजनीति में नेताओं के बिगड़े बोल भावी पीड़ी के लिए एक दुखद सबब है। यह बात बहुत साफगोई से हमें समझनी चाहिए कि हमारे…
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