सेकुलरिज्म या दिखावा, धर्म के नाम पर व्यक्तिगत आजादी का हनन क्यों?
Delhi, ( राजेश्वर सिंह ) सेकुलरिज्म या दिखावा : धर्म के मुद्दे बड़े संवेदनशील होते हैं, उनमें तर्क- वितर्क करना (तथाकथित धर्म गुरुओं के अनुसार) अपराध माना जाता है . फिर उनमें अपने अनुसार नीतियां बना ली जाती हैं, जिनका पालन उस धर्म के मानाने वालों द्वारा किया जाता है. मगर सवाल खड़ा तब हो जाता है जब आज के मॉडर्न धार्मिक ठेकेदार अपने हिसाब से मान्यताओं को सेट करने लग जाता है. ये कोई पहला मौका नहीं,जब अपनी दिमाग की उपज किसी दूसरे पर धर्म के नाम पर थोप…
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