हमें अपनी कोख का इतना घंमड क्यों है??
70 बरस की आजादी के बाद 2018 के आधुनिक भारत के दौर में जब यह शीर्षक लिखा जा रहा है। हमें अपनी कोख का इतना घंमड आखिर है क्यों? इस विमर्श के निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले इसकी बुनियाद समझिए। पूरे भारत में और उसमें भी विशेषकर उत्तर भारत में लोगों में अपनी जातीय पहचान को लेकर बेहद संवेदनशीलता है। जातीय पहचान का तात्पर्य है आपने समाज में स्थापित वर्ण व्यवस्था के किस वर्ण में जन्म लिया। यही से कोख का घंमड जन्म लेता है। कहीं पर किसी को गर्व…
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