सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं के पक्ष में लिया ये बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना में महिलाओं के पक्ष में बड़ा फैसला लेते हुए स्थाई कमीशन पर अपनी मुहर लगा दी है। एक निश्चित समय सीमा तय करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 3 महीने का समय दिया है। जिसके अंदर केंद्र सरकार को सेना में महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन गठन करने का आदेश दिया है।
इस फैसले के साथ ही उच्चतम न्यायालय ने मानसिकता को बदलने की सलाह देते हुए कहा है कि सेना में महिलाओं को सभी ब्रांच में कमांडिग रोल मिले। हालांकि काॅम्बेट रोल अभी भी प्रदान नहीं किया गया है।
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आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के अनुसार महिला सैनिकों को स्थाई कमीशन मिलने पर मुहर लगी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी और कहा था कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं।

अंततः इतने सालों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थल सेना में महिलाओं के हक में फैसला हुआ। उच्चतम न्यायालय के फैसले में तीन बातें अहम हैं जिनमें शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत आने वाली सभी महिला अफसर स्थाई कमीशन की हकदार होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 14 साल से कम और उससे ज्यादा सेवाएं दे चुकीं महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन का मौका दिया जाए। वहीं महिलाओं को कॉम्बैट रोल देने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और सेना पर छोड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जंग में सीधे शामिल होने वाली जिम्मेदारियां (कॉम्बैट रोल) में महिलाओं की तैनाती नीतिगत मामला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यही कहा था। इसलिए सरकार को इस बारे में सोचना होगा।’
SC ने कहा है, ‘थलसेना में महिला अफसरों को कमांड पोस्टिंग नहीं देने पर पूरी तरह से रोक लगाना बेतुका है और बराबरी के अधिकार के खिलाफ है। महिलाओं को कमांड पोस्टिंग का अधिकार मिले

