पीएम मोदी ने किया बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन – जानिए ब्रिज से होने वाले फ़ायदे
फ़कत 4.94 किलोमीटर की लंबाई के नए-नवेले बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन गत मंगलवार को किया गया जो कि एशिया का दूसरा एवं भारत का पहला सबसे लंबा ब्रिज है पीएम मोदी ने आसाम में इस बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन किया एवं उसी के साथ ही अभूतपूर्व इंजीनियरिंग के इस नायाब नमूने को आम जनता के लिए खोल दिया गया जो कि उत्तर-पूर्व में विकास के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है बोगीबिल ब्रिज की खासियत –
गत मंगलवार को पीएम मोदी ने जिस बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन किया वह ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी छोर पर बसे आसाम राज्य के डिब्रूगढ़ जिले को उत्तरी छोर पर स्थित अरूणाचल प्रदेश की सीमा से सटे धीमाजी जिले के सीलापत्थर को आपस में जोड़ेगा,, बोगीबिल ब्रिज का उद्धाटन होते समय देश-भर में उत्साह रहा चूँकि यह एक रोड-कम-रेलवे ब्रिज है, यह अपने किस्म का एक डबल-डेकर ब्रिज है जिसके निचले तले पर दो रेलवे-लाइन्स है एवं ऊपरी तले पर तीन-लेन की सड़क है,, गौरतलब है चूँकि उत्तर-पूर्व के इस इलाके में बारिश बहुत होती है इस लिहाज से इस जब बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन किया गया तो एक दिलचस्प बात यह थी कि सड़के रबड़ की बनाई गयी हैं,, बोगीबिल ब्रिज इतना मजबूत है कि जहाँ एक तरफ इसकी क्षमता भारी मिलिट्री टैंक तक को वहन करने की है वही दूसरी ओर इसके रेलवे ट्रैक पर दो ट्रेने आमने-सामने से 100 किलोमीटर की रफ्तार से आवाजाही कर सकती है।। जिस बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया है उसे हैदराबाद स्थित नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी ने बनाया है।
बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन की राजनीति –
आप भारत के किसी भी कोने में चले जाइए,, कश्मीर की वादियों से राजस्थान के रेगिस्तानों तक, मध्य प्रदेश के पठारों से बंगाल के सुंदबन तक कुलजमा तीन बातें आपको लगभग सारे हिंदुस्तान की कमज़र्फ समान ही मिलेगीं राजनीति, सिनेमा एवं क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी एक अद्भुत ही स्तर की है,, भारत में कुछ भी राजनीति से अछूता नहीं है एवं लोगों की इसमें दिलचस्पी भी बहुत ज्यादा है,, बोगीबिल ब्रिज का उद्धाटन होत ही 2019 के चुनावों के मद्देनजर चुनावी राजनीति भी तेज हो गयी है,, इस ब्रिज के बनने में तीन प्रधानमंत्रियों के 21 बरस का समय लगा,, जनवरी 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा ने इसकी आधारशिला रखी थी, एवं साल 2002 में अटल विहारी वाजपेयी ने इसके निर्माण-कार्य का उद्घाटन किया था, एवं गत मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन किया,, अब बीजेपी कह रही है कि यह ब्रिज उसकी देन है और कहीं हद तक यह दावा बहुत ठीक भी है क्योंकि बीजेपी सरकार के दौर में ही बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन हुआ एवं इसके निर्माण में तेजी आई।
बोगीबिल ब्रिज का उद्घाटन से होने वाले फायदे –
दावा किया जा रहा है कि बोगीबिल ब्रिज उद्घाटन के साथ ही 120 साल तक यूँ ही कार्यशील रहेगा,, कुलजमा 5900 करोड़ की लागत में यह बोगीबिल ब्रिज बना है, बोगीबिल ब्रिज के उद्घाटन के साथ ही यह अपने -आप में एक पहला मौका था जब यूरोपियन कोडिंग एवं वेल्डिंग मानकों के लिहाज से भारत में कोई ब्रिज बनाया गया। बोगीबिल ब्रिज के उद्घाटन से होने वाले फायदों को कुछ यूँ समझा जा सकता है –
1.) यह बोगीबिल ब्रिज ब्रह्पुत्र नदी के उत्तरी तट एवं दक्षिणी तट को आपस में जोड़ेगा।
2.) बोगीबिल ब्रिज के उद्घाटन के साथ ही आसाम से अरूणाचल प्रदेश के सफर की दूरी को चार घंटे तक के लिए कम कर देगा जिससे इन दोनों राज्यों के बीच आवाजही बढेगी।
3.) बोगीबिल ब्रिज उत्तर-पूर्व को आर्थिक मायनों में बहुत फायदा पहुँचाएगा चूँकि अब बोगीबिल ब्रिज के उद्घाटन के साथ ही ट्रांसपोर्ट सुविधा अच्छी रहेगी जो कि उद्योगों को आकर्षित करेगी, साथ ही पर्यटन को भी बढावा मिलेगा।
4.) बोगीबिल ब्रिज के उद्घाटन के सुरक्षा कारणों से भी अपने महत्व है,, भारत की पूर्वोत्तर सीमा तक पहुँचने में भी इससे सेना को काफी मदद मिलेगी,, जिससे चीन के नापाक इरादों पर अब कड़ी नजर रखी जा सकेगी।
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