इश्क़ के साथ साथ अब चुनाव में भी उम्र की सीमा नही मानी जायेगी
इस समय भारत देश मे विकास किस पर हो रहा है यह कहना जरा सा मुश्किल है। इसका वजह साफ है कि देश का हर मुद्दे पर पेचम पेचिदा हालात का होना। विकास पर राजनीति कुछ समय पहले की बात थी अब राजनीति में विकास होने की संभावना है।
देश के सियासी हालात में जिस तरह से भूचाल आ रहे है इन भूचालों के बीच भारतीय जनता पार्टी अपने ही नियमों में खुद को ढील दी सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा उम्मीदवार के चयन के समय अपने 75 वर्ष के नियम में छूट देने का विचार कर सकती है ।
भारतीय जनता पार्टी ने अभी इस पर विचार नही किया है कि उम्मीदवारों को छूट किस प्रकार से दी जाए औऱ ऐसे कौन से मामले हो सकते है जिनमे छूट देने की आवश्यकता हो सकती है । ऐसा माना जा रहा है कि इसका फैसला उम्मीदवारों के चयन के वक्त ही किया जाएगा।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी को आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा लग रहा है कि उसके कई दिग्गज नेताओं का मतदाताओं पर जबरदस्त प्रभाव है। इस वजह से ऐसे कई नेता है जो इस नियम के अनुसार अपनी हाज़िरी दे रहे है ।
भारतीय जनता पार्टी को डर है कि अगर यह दिग्गज नेता चुनाव नही लड़ पाये तो इसका खामियाजा यह होगा कि आने वाले चुनाव में इन्हें मुँह की खानी पड़ेगी । लोकसभा उम्मीदवारों के चयन में जातिवाद भी अपना वर्चस्व दिखा रहा है ।
कुछ ऐसे नेता है जो ऊँची जाती से सम्बंधित है वही कुछ ऐसे नेता है जो पिछड़ी जातियों से संबंधित है । वही कुछ ऐसे नेता है जिनका अपने जाति समुदाय पर गहरा दबदबा है। वही भारतीय जनता पार्टी में कुछ ऐसे नेता है जो पूरे राज्य में लोकप्रिय हैं ।
गौरतलब है कि अगर इस नियम को लागू किया गया तो मुरली मनोहर जोशी से लेकर लाल कृष्ण आडवानी तक इस से प्रभावित होंगे । पार्टी के दिग्गज नेता हुकुमदेव नारायण यादवकलराज मिश्र, भुवनचंद्र खंडूरी, शांता कुमार, , बी.एस. येदियुरप्पा और सुमित्रा महाजन भी इसके दायरे में आ जाएंगे।

