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Nirbhaya Case : अब नहीं बच सकेगा अक्षय ठाकुर, मिलेगी उसके कर्मों की सही सजा

निर्भया रेप केस आज से नहीं बल्कि काफी समय से चर्चा में है लेकिन इन्तजार है तो सिर्फ और सिर्फ उनके आरोपियों की सजा की। हर कोई इस फैसले को सुनने को आतुर था कि आखिर कब निर्भया के दोषी फांसी पर चढ़ेंगे या फिर किस दिन निर्भया के दोषी को फांसी लगेगी। जैसा कि अपने इस मामले में सुना ही होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप ( Nirbhaya Case ) के गुनाहगार अक्षय ठाकुर की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।

लेकिन एक बार फिर से आज इस मामले को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई होनी थी। कहा जा रहा था कि माना जा रहा है कि कोर्ट आज चारों दोषियों का डेथ वॉरंट जारी कर सकता है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में हम डेथ वॉरंट जारी नहीं कर सकते। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब दोषियों को पटियाला हाउस कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा। जहां मामले की सुनवाई हुई।

Nirbhaya Case पर सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की पुनर्विचार याचिका

कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर-1973, यानी दंड प्रक्रिया संहिता- 1973 (CrPC) के तहत 56 फॉर्म्स होते हैं। फॉर्म नंबर 42 को डेथ वारंट कहा जाता है। इसके ऊपर ‘वारंट ऑफ एक्जेक्यूशन ऑफ अ सेंटेंस ऑफ डे’थ’ लिखा होता है। वहीं इसे ब्लैक वारंट या फिर डेथ वॉरेंट के नाम से भी जाना जाता है। जिसके जारी होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति को फांसी दी जाती है।

फांसी का दिन करीब आते समय अवसाद में चल गए निर्भया के दोषी, खाना-पीना छोड़ा

ऐसे में अगर ध्यान दें निर्भया मामले में तो निर्भया रेप और मर्डर मामले में दोषी पाए गए चारों अभियुक्तों को अदालतों या राष्ट्रपति से राहत नहीं मिलती है तो उन्हें फांसी पर लटकाने के लिए फॉर्म नंबर 42 यानी ब्लैक वारंट का इस्तेमाल किया जाएगा।

आज वहीं सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुनाते हुए जस्टिस भानुमति ने कहा कि ट्रायल और जांच सही हुई है और उसमें कोई खामी नहीं है। अगर बात करें फांसी की तो उसमें कोर्ट ने बचाव का पूरा मौका दिया है। इतना ही नहीं जज ने आगे कहा कि हमें याचिका में कोई ग्राउंड नहीं मिला है। इस तरह अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई।

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