जानें नवाज़ुद्दीन सिद्द्की की ज़िंदगी से जुड़ा, वो 12 साल का सच
दोस्तों, वैसे तो एक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्द्की आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं| फिल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ के बाद पिछले 7 सालो में उन्होंने पूरे बॉलीवुड से अपनी अदाकरी का लोहा मनवाया है| चाहे वो मंटो के रोल में दुनिया के सामने अपनी बात को रखना हो या बाल ठाकरे के रूप में अपने एक इशारे से पूरा मुंबई बंद कराना हो| नवाज़ुद्दीन सिद्द्की जैसे चुटकियो में ये सारे किरदारों को जीवंत कर जाते है| लेकिन क्या ये सफर इतना आसान था, क्या वो वॉचमन वाली कहानी सही है?
तो आइए दोस्तों, आज हम आपको रूबरू करवाते है नवाज़ुद्दीन के उन कई सारे तथ्य से जो बेहद कम लोग जानते है|
1- नवाज़ुद्दीन सिद्द्की ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत 1999 में आई फिल्म ‘सरफरोश’ से की थी| जिसमे उनको मुश्किल से 10 सेकंड का रोल मिला था| इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘मुन्ना भाई ऍम.बी.बी.एस.’ में एक पॉकेट मार का रोल किया| उस वक़्त उनपर किसी की नज़र भी नहीं गयी की ये शख्स कभी इतना बड़ा स्टार भी बन सकता है|
2- 2012 में आयी फिल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ में चिलम पीते हुए और लुंगी पहने गैंगस्टर का उनका रोल सुपरहिट रहा| फैज़ल खान के रूप में लोगो ने उन्हें खूब प्यार दिया| उनके द्वारा बोले गए डायलॉग आम आदमी की ज़ुबान पर चढ़ने लगे और धीरे-धीरे साधारण सी शक्ल का दिखने वाला इंसान स्टार बन गया|

3- जी हाँ, ये बिल्कुल सच बात है की नवाज़ ने वॉचमन तक की नौकरी की हुई है| दरअसल नवाज़ जब दिल्ली में रह कर थिएटर कर रहे थे तो थिएटर से उनकी रोज़ी-रोटी नहीं च पा रही थी| जिसके लिए उन्होंने कुछ समय वॉचमन का काम भी किया|
4- नवाज़ अपने हर इंटरव्यू में एक बात ज़रूर कहते है की उनकी माँ को उनके एक्टर बन जाने का पूरा यकीन था| वो उनसे कहती थी की 12 साल में तो कूड़े की शकल भी बदल जाती है और फिर तू तो इंसान है|
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