पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं के सुरक्षा की मांग के लिए आगे आया विश्व हिंदू परिषद
पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों पर किस तरह का अत्याचार हो रहा है। यह बात किसी से छुपी नहीं है। विभाजन के समय पाकिस्तान में हिंदू की जनसंख्या काफी ज्यादा थी। मगर धीरे-धीरे वर्षों के साथ यह जनसंख्या कम होती गई। अब हालात यह है कि पाकिस्तान में हिंदू कुछ गिने-चुने क्षेत्रों में ही बचे हैं। पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो कि भारत पर अक्सर अल्पसंख्यकों पर हमले करने का आरोप लगाता है मगर पाकिस्तान के अंदर खुद ही हालात बद से बदतर हैं। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद ने यह मांग की है कि पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं की धार्मिक, सामाजिक सुरक्षा के लिए विश्व समुदाय पर दबाव बनाया जाए। साथ साथ उन्हें भारत के नागरिक अधिकार भी प्रदान किए जाएं।
विश्व हिंदू परिषद ने उठाई हिंदुओं को सुरक्षा देने की मांग
वीएचपी के विदेश विभाग के केंद्रीय मंत्री प्रकाश हरतालकर ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि भारत सरकार अब पाकिस्तान ने बचे सभी अल्पसंख्यकों के सुरक्षा के लिए विश्व समुदाय पर दबाव बनाएं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आजादी के पूर्व भारत का अभिन्न अंग था। ऐसे में वहां पर हिंदुओं पर जघन्य अत्याचार किए जा रहे हैं। उनकी हालत ऐसी है कि वह ना तो जी सकते हैं और ना ही मर सकते हैं। आए दिन पाकिस्तान से हिंदुओं के ऊपर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। अभी कुछ समय पहले हिंदू नाबालिक लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन करवाने को मजबूर करने की खबरें भी आई थीं।
लगातार कम हो रही है अल्पसंख्यकों की आबादी
जिस समय पाकिस्तान का विभाजन हुआ था उस समय पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की संख्या 16% थी। मगर धीरे-धीरे छह दशकों में यह संख्या घटकर 2 से 3% पर आ गई है। 20 करोड़ की जनसंख्या वाले पाकिस्तान देश में अब केवल 60 से 70 लाख की हिंदू बचे हैं। इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, बौद्ध ,जैन, इसाई सभी धर्म के लोग शामिल हैं। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं में 92% हिंदू अभी सिंध प्रांत में रहते हैं। ऐसे में भारत सरकार को इन लोगों की सुरक्षा के लिए विश्व समुदाय पर दबाव बनाना चाहिए।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



