जानियें प्रयागराज के इन घाटों के बारे में, जिनका अपना है अलग महत्वFeatured Article News Trending 

जानियें प्रयागराज के इन घाटों के बारे में, जिनका अपना है अलग महत्व

प्रयागराज की बात करें तो यहां कई तरह के घाट है जिसका अपना अलग-अलग नाम है। जिसका अपना अलग महत्व होता है। जहां अबकी महाकुंभ के दौरान घाटों का सुंदरीकरण हुआ है।

त्रिवेणी घाट

प्रयागराज की पहचान ही त्रिवेणी घाट से है जहां की महिमा अपरंपार है कोई कहीं से भी चलता है देश विदेश से तो जरूर जिंदगी में एक बार त्रिवेणी के तट पर आकर जरूर स्नान करना चाहता है। जहां गंगा यमुना, सरस्वती का ऐसा समागम है कि साक्षात ईश्वर का आशीवार्द प्राप्त होता है।

दशाश्वमेध घाट

चार वेदों की प्राप्ति के बाद ब्रह्माजी ने प्रयागराज में ही यज्ञ किया था। सृष्टि की प्रथम यज्ञ स्थली होने के कारण ही इसे प्रयाग कहा गया। प्रयाग माने प्रथम यज्ञ। प्रयागराज के गंगा घाटों का भी अपना इतिहास है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट का ऐतिहासिक महत्व है। इस घाट पर धर्मराज युधिष्ठर ने दस यज्ञ कराए थे। उसके पहले ब्रह्माजी ने भी यहां यज्ञ किया था। इसीलिए इस घाट को दशाश्वमेध घाट कहा जाता है।यहां एक साथ दो शिवलिंगों ब्रह्मेश्वर और दशाश्वेवर की पूजा होती है. सावन में इस मंदिर में विशेष पूजन का महत्व है

रसूलाबाद घाट

यह घाट प्रयागराज शहर के उत्तरी क्षेत्र में स्थित रसूलाबाद मुहल्ले में गंगा तट पर है। यहां साल भर लोग स्नान करते हैं। यहां पर अंतिम संस्कार भी किया जाता है। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद सहित तमाम ख्यातिनाम लोगों का यहां पर अंतिम संस्कार होने के कारण इस घाट का ऐतिहासिक महत्व भी है।

शंकर घाट

यहां नागेश्वर महादेव मंदिर के साथ अन्य मंदिर हैं जिसमें हनुमान, गणेश, मां दुर्गा आदि की मूर्तियां विराजमान हैं।

सरस्वती घाट

अकबर के किले के करीब यमुना नदी के तट पर यह घाट स्थित है। समीप में एक रमणीक पार्क भी बनाया गया है। यहां पर लोग स्नान के अलावा नौकायन के लिए भी जाते हैं। यहां से संगम जाने के लिए हर समय नाव मिलती हैं। मनकामेश्वर महादेव का मंदिर भी इसी घाट के समीप है।

रामघाट

यह घाट संगम क्षेत्र में गंगा पर स्थित है। त्रिवेणी क्षेत्र स्थित काली सड़क से यहां सीधे पहुंचा जा सकता है। दैनिक स्नानार्थियों की सर्वाधिक भीड़ इस घाट पर होती है।

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