नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ क्यों हो रहा विरोधBreaking News News 

नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ क्यों हो रहा विरोध, क्या लोगों को होगा फायदा?

आज हर तरफ नागरिकता संशोधन बिल की बातें हो रही है, जिसे देखो वो इसी की बात कर रहा है। हो भी क्यों न भला अब ये बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया। विस्तृत रूप में बात करें तो बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि इसके खिलाफ 99 सदस्‍यों ने वोट किया। हालांकि यह भी सच है कि जब इस बिल पर वोटिंग चल रही थी उस दौरान शिवसेना ने राज्‍यसभा से वॉकआउट किया था। दरअसल आपको यह बता दें कि इस बिल में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।

जब इस विधेयक की चर्चा हो रही थी तब से लेकर वोटिंग के दौरान भी सदन में खूब सारा हंगामा हुआ जबकि केंद्र सरकार का कहना था कि यह बिल लाखों लोगों के लिए एक आशा की किरण है। इस बिल की वजह से जो अल्पसंख्यक बाहर से हमारे देश में आए, उन्हें राहत मिलेगी और तीन पड़ोसी मुल्कों से लोग हमारे देश में आयेंगे। वहां उन्हें समानता का अधिकार नहीं मिला, वो लोग अपने देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। वो लोग अपनी उम्मीद लेकर भारत आए थें।

नागरिकता संशोधन बिल : क्या कहता है विपक्ष?

अब सबसे पहले बात करते हैं विपक्ष की, तो ये सवाल आपके मन में भी आता होगा कि आखिर विपक्ष इस बिल का विरोध क्यों कर रहा है ? विशेषरूप से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है, उनका कहना है कि यह संविधान के खिलाफ है जो समानता के अधिकार की बात करता है।

नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ क्यों हो रहा विरोध

क्या है इस विधेयक का लक्ष्य

अब विचार करने वाली बात तो यह है कि आखिर इस बिल में संशोधन करने से क्या फायदा होगा और इसका क्या लक्ष्य है ? तो आपको बता दें कि इन बिल में संशोधन करने से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश यानी की हमारे पडोसी देशों में उत्पीड़न से भागकर भारत आए सिख, ईसाई, पारसी, जैन, बौद्ध और हिंदू समुदाय के लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता आसान हो जाएगा। इस बिल के पास होने से पहले भारत देश की नागरिकता प्राप्त करने के लिए लोगों को इस देश में 11 साल निवास करना अनिवार्य था लेकिन अब इस बिल के पास हो जाने के बाद ये अवधि कम हो गई।

आइये समझते हैं क्या है नागरिकता संशोधन बिल

पिछले कई दिनों से देश भर में बस एक ही बात पर चर्चा चल रही है, नागरिकता संशोधन बिल कहीं कोई इसका विरोध कर रहा तो कहीं इसके खिलाफ आक्रोश ही मचा हुआ है। मगर अभी तक बहुत से लोगों को यह ही नही समझ आ रहा की आखिर ये बिल है क्या और इसका मतलब क्या है। वैसे सामान्य भाषा में समझा जाये तो इस बिल का सीधा सा मतलब यही है की हमारे कुछ पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ-साथ कुछ अन्य धर्म के लोग जैसे सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने की राह आसान हो जाएगी। इसके बारे में थोड़ा विस्तार से समझते हैं इस विडियो के माध्यम से।

जी हां, नागरिकता संशोधन बिल के अनुसार अब बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान कर दिया गया है। सबसे खास बात तो यह है कि नागरिकता अधिनियम, 1955 को साल 2016 में ही संशोधन करने की मांग उठी थी, जिसके अंतर्गत अधिनियम की अनुसूची 3 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है ताकि वे 11 वर्ष की बजाय 6 वर्ष पूरे होने पर नागरिकता के पात्र हो सकें। हालाँकि इस दौरान भारत के विदेशी नागरिक जो OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड धारक हैं यदि वो किसी भी कानून का उल्लंघन करते है तो उनको दिया गया यह अधिकार उनसे छीन लिया जायेगा।

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