नागरिकता संशोधन विधेयक को मिली कैबिनेट से मंजूरी
केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक की और अहम कदम बढ़ा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इस महत्वाकांक्षी विधेयक को मंजूरी दे दी है। सोमवार को इसे लोकसभा में पेश किया जा सकता है। विपक्षी दलों के रवैया को देखते हुए माना जा रहा है कि संसद में इस पर व्यापक बहस हो सकती है। गणित की बात करें तो लोकसभा में इसे पारित कराना सरकार के लिए मुश्किल नहीं होगा राज्यसभा में भी कुछ राजग दलों की ओर से समर्थन की उम्मीद है। राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर छिड़ी बहस के बीच ही मोदी सरकार की ओर से साफ कर दिया गया था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताड़ना के कारण भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन व अन्य धर्मावलंबियों को भारत में नागरिकता दी जाएगी।

मुस्लिम को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा क्योंकि इन तीनों देशों में मुस्लिम ही बहुमत में हैं। इस संबंध में सरकार ने पिछले साल भी लोकसभा से विधेयक पारित करा लिया था लेकिन राज्यसभा में विपक्ष ने इसे रोक दिया। हालांकि भाजपा सूत्रों का मानना है कि इस बार राज्यसभा में भी कोई अड़चन नहीं आएगी। दोनों सदनों में भाजपा के रणनीतिकार अभी से चुस्त हैं। कई राजनीतिक दल इस विधेयक के विरोध में है। हालांकि मुख्य विरोध कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की ओर से ही किया गया है।
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बुधवार को कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विधेयक पूरे देश के हित में है। इसका हर वर्ग स्वागत करेगा। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के दिल के सबसे करीब है। एक दिन पहले ही भाजपा संसदीय दल की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने का स्पष्ट निर्देश दिया है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान में यह विधेयक भाजपा के वादों में शुमार रहा है।

