आगरा में संजली नाम की दसवीं की बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया !!
कभी बुलंदशहर में कोई हत्यारी भीड़ आकर किसी शख्स को मौत के घाट उतार देती हैं तो कभी आगरा में दसवीं कक्षा की किसी संजली नाम की दलित बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया जाता है, रामराज्य की उम्मीद में ऐसी हर घटना उसका गला घोंटती नजर आती हैं। 22 करोड़ की आबादी का यह उत्तर प्रदेश योगी से सँभले नहीं सँभल रहा है!!
आगरा में संजली नाम की दसवीं की बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया, जानिये क्या है पूरी घटना –
18 दिसंबर 2018 को मलपुरा क्षेत्र के लालऊ गाँव की रहने वाली संजली अपने गाँव से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नौमील गाँव स्थित अशरफी देवी इंटर काॅलेज से पढकर लौट रही थी। दोपहर 1.40 पर छुट्टी हुई तो वह साईकिल से ही अपने घर लौट रही थी, सवा दो बजे लालऊ पुलिया के पास दो युवक आए। उन्होनें हेलमेट लगा रखा था, उन शैतानों ने एक बोतल से उस बच्ची पर पेट्रोल छिड़का, लाइटर से आग लगाई और बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया उसके बाद भाग निकले।
पर आप उसकी हिम्मत देखिए वह चिल्लाते हुए सड़क तक आई, आस-पास के राहगीरों ने प्रयास किया पर आग नहीं बुझ सकी। हालाँकि बाद में एक स्कूल बस ड्राइवर ने अग्निशमन यंत्र से उसकी आग बुझाई। जैसे ही यह खबर उनके घर पहुँची माँ अनीता एवं पिता हरेन्द्र तुरंत मौके पर पहुँचे, बाद में संजली को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया पर उसका 80% शरीर जल चुका था। जहाँ से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया पर दुखद यह है कि उसकी साँसे थम गयी।
लालऊ गाँव बना दलित राजनीति का नया केन्द्र:-
2019 के चुनाव सर पर हैं, तो राजनेताओं की इस मौत पर ओछी राजनीति शुरू हो चुकी है। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, सांसद, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर सभी ने लालऊ गाँव का दौरा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी ने कल ट्वीट कर इस संबंध ( बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया ) में घटना की कड़ी निन्दा की है। बसपा के कार्यकर्ता सड़कों पर है, एवं भीम आर्मी ने भी 20 दिसंबर को जब संजली का शव घर पहुँचा तो कि एक करोड़ रूपये एवं एक सदस्य को नौकरी की माँग की थी पर पुलिस की समझाइश पर वे माने और दाह संस्कार किया।
निष्कर्ष:-
इस पूरी घटना का सबसे दुखद हिस्सा है, यह पूरी घटना, गौरतलब रहे कि जिस दिन संजली, दसवीं की बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया गया। उसी 18 दिसंबर को सूबे के डीजीपी आगरा में थे, जिस होटल में बैठकर वे अधिकारियों से कानून व्यवस्था के चाक-चौबंद होने के झूठे दावे सुन रहे थे। वहीं से 15 किमी दूर उसी कानून और संविधान की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थी। इतनी हिम्मत अपराधियों में कैसे आ गयी कि उन्होंने बच्ची को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया।
ये वही यूपी पुलिस है न जो अबसे कुछ महीनों पहले तक एनकाउंटर-पुलिस के नाम से मशहूर थी। पर अब अपने साथियों तक बचा पाने में नाकाम है, अब प्रशासन को चाहिए कि इस मामले पर कड़ी कार्यवाही करते हुए दोषियों को सख्त से सख्त सजा दें। ताकि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनी रहे एवं इस तरह की नृशंस घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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