सोशल मीडिया को आधार से लिंक करने का क्या है आधार : सुप्रीम कोर्ट
हमारे देश में जबसे डिजिटल क्रांति आयी है तब से लेकर इंटरनेट यूज करने वालों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। और यह संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी बातें रखते हैं और राय व्यक्त करते हैं। मगर सोशल मीडिया सरकार के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है क्योंकि सोशल मीडिया के कारण कभी-कभी सामाजिक हालात बुरे भी बन जाते हैं।
यही कारण है कि कुछ राज्य सरकारों ने सोशल मीडिया को आधार कार्ड से लिंक करने का विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कहा था। अब देश की उच्चतम न्यायालय ने सरकार से यह सवाल किया है कि यदि वह सोशल मीडिया को आधार से लिंक करने का विचार कर रही है तो उसका आधार क्या हो सकता है।
सोशल मीडिया को आधार से लिंक करने की योजना बताएं सरकार
उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अध्यक्षता में गठित की गई पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार सोशल मीडिया को आधार कार्ड से जोड़ने की क्या कोई योजना बना रही है। यदि सरकार की ऐसी कोई योजना है तो वह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास क्या उपाय हैं ? मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय की गई है।
कई उच्च न्यायालय में दायर की गई थी याचिकाएं
विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नंबर चल रही कई तरह की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। मद्रास हाईकोर्ट में दो याचिकाएं मध्यप्रदेश और बॉम्बे हाई कोर्ट में एक-एक याचिका दायर की गई थी। जिसके बाद फेसबुक ने इन याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट को अपने संज्ञान में लेने के लिए कहा था क्योंकि विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों में टकराव देखा जा सकता है।
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