बेटे और बहू से तंग आकर पिता ने सरकार के नाम कर दी सारी संपत्ति
हमारे देश में माता पिता को देवताओं से भी उच्च स्थान दिया गया है। मगर आज की जनरेशन के लिए यह बात केवल पुस्तकों तक सिमट कर रह गई है। देश में अनेक ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जब संतानों द्वारा अपने माता पिता को सताया जाता है और उन्हें बुढ़ापे में भटकने के लिए और दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया जाता है। हाल ही में ऐसी ही एक घटना उड़ीसा में देखने को मिली जब एक अध्याय पिता ने बेटे और बहू की हरकतों से तंग आकर अपनी सारी संपत्ति सरकार के नाम कर दी। उसके पिता ने इच्छा जताई कि उसकी जमीन पर एक वृद्ध आश्रम बना बनाया जाए ताकि भविष्य में इसी तरह अपने संतानों द्वारा दुत्कार दिए जाने वाले माता पिता यहां पर आकर रह सकें और उन्हें एक छोटा सा सहारा मिल सके।
प्रताड़ित होने के बाद लिया यह फैसला
दरअसल उड़ीसा के जाजपुर के दशरथपुर प्रखंड के मुरारी पुर गांव के रहने वाले 75 वर्षीय खेत्र मोहन मिश्रा ने बताया कि उनके बेटे और बहू का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं रहता है। दोनों की वजह से उन्हें काफी ज्यादा मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसकी वजह से उन्होंने मजबूर होकर अपनी समस्त संपत्ति को सरकार के नाम करने का फैसला किया। उन्होंने जाजपुर के जिलाधिकारी रंजन के दास को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने अपनी जमीन पर एक वृद्धाश्रम बनाए जाने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने मांग की कि अब वह वृद्धाश्रम में रहना चाहते हैं। जिलाधिकारी ने उनके रहने की व्यवस्था एक वृद्धाश्रम में कर दी है।
अस्थियां तक नहीं छूने देना चाहते
हर पिता की इच्छा होती है कि उनका बेटा उनके आखिरी वक्त में उनके शरीर को अग्नि दे मगर खेत्र मोहन मिश्रा के बहू और बेटों ने ऐसी परिस्थितियां ला दी है कि वह मरने के बाद अपनी अस्थियों तक को उन्हें छूने नहीं देना चाहते। जिलाधिकारी ने उनकी जमीन पर एक वृद्धाश्रम खोलने का निर्णय ले लिया है। मगर सवाल यह खड़ा होता है कि क्या वृद्धाश्रम खुल जाने से संतान अपने माता पिता की अहमियत को समझने लगेगी। जो माता पिता बचपन से लेकर हमेशा अपने बच्चों की जरूरत को पूरा करने का हर संभव प्रयास करते आए हैं। संतान उन्हीं माता पिता को ठोकर मार कर घर से बाहर कर देती है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



