जानियें दिसंबर महीने के बारे में, जहां दिन छोटा और रात लंबी होती हैEnvironment Interesting Knowledge News 

जानियें दिसंबर महीने के बारे में, जहां दिन छोटा और रात लंबी होती है

सर्दियों का मौसम आ चुका है, अभी दिसंबर का महीना चल रहा है। ठंड के दिनों में दिन छोटे होते हैं, और रातें लंबी होती हैं। दिसंबर के महीने में एक दिन ऐसा भी आता है, जिस दिन साल का सबसे छोटा दिन होता है और सबसे लंबी रात होती है। यह दिन 21 दिसंबर को आता है, जिसे शीतकालीन संक्रांति के नाम से जाना जाता है। यह दिन एक ऐसा दिन होता है, जब पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी सबसे ज्यादा होती है, जिससे दिन केवल 8 घंटे का होता है और रात लंबी होती है। इस दिन चांद की रोशनी पृथ्वी पर अधिक समय तक बनी रहती है। आपको बता दें, यह खगोलीय घटना पूरे साल में सिर्फ एक बार होती है, और इसे सर्दी के मौसम की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।

शीतकालीन संक्रांति

21 दिसंबर के दिन को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि, इसे शीतकालीन संक्रांति का दिन माना जाता है। इस दिन रात का समय लगभग 16 घंटे का होता है और दिन का समय मात्र 8 घंटे का होता है। आपके मन में भी अगर यह सवाल उठ रहा है, कि आखिर इस दिन ऐसा क्यों होता है, तो चलिए जानते हैं।

दिन और रात के समय में बदलाव का खगोलीय कारण

यह खगोलीय घटना पृथ्वी के 23.4 डिग्री झुकाव के कारण होती है, जो उसे सामान्य दिनों से अलग बनाती है। सामान्य दिनों में दिन और रात लगभग बराबर होते हैं यानी 12 घंटे का दिन होता है और 12 घंटे की रात होती है। लेकिन 21 दिसंबर के बाद रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। इसे विंटर सोलस्टाइस कहा जाता है।

सूर्य के प्रभाव से मौसम में बदलाव

इसे इस तरह अच्छे से समझा जा सकता है, जैसे जब पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुका होता है, तब उस क्षेत्र में गर्मी का मौसम होता है और दिन की अवधि लंबी होती है, रातें छोटी होती है। इसके विपरीत देखा जाए, तो जब सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्ध पर तिरछी पड़ती है, तो वहां सर्दी का मौसम होता है और दिन छोटे होते हैं रातें लंबी होती है। इस प्रक्रिया के कारण ही पृथ्वी पर मौसम के बदलाव और दिन रात के समय में भिन्नता होती है।

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