टेलिकॉम कंपनियों पर छाया बड़ा संकट, Vodafone-Idea-Airtel के पास अब ये है आखिरी विकल्प
AGR (Adjusted Gross Revenues) मामले पर सख्त रवैया अपनाते हुए टेलिकॉम कंपनियों को किस भी तरह की कोई राहत देने से सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया नहीं देने को लेकर दूरसंचार कंपनियों को फटकार भी लगाई है। आपको यह भी बता दें कि अदालत ने इन टेलिकॉम कंपनियों को फटकार लगाते हुए 14 फरवरी की खत्म होने तक 1.47 लाख करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। अदालत ने इन सभी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर यह बताने के लिए कहा है कि बकाये को चुकाने को लेकर शीर्ष अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया है।

टेलिकॉम कंपनियों के सामने क्या है विकल्प
चूँकि अब टेलिकॉम कम्पनियों को भी सुप्रीम कोर्ट ने काफी वक़्त दिया और उसके बाद भी बकाया भुगतान नहीं करने के बाद अदालत ने सख्ती दिखाई है जिसके बाद अब मोबाइल कंपनियों को इस बकाये का भुगतान करना ही पड़ेगा। बताया जा रहा है कि अभी हाल ही में देश की नामी कम्पनी एयरटेल ने ओवरसीज बॉन्ड और QIP (qualified institutional placement) से तक़रीबन 3 अरब डॉलर जुटाए हैं और माना जा रहा है कि इसी के जरिए एयरटेल अपने बकाये का भुगतान कर सकता है।
मगर देश की दुसर प्राइवेट टेलिकॉम कम्पनी वोडाफोन-आइडिया किस तरह से अपना बकाया देगी इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जैसा की बताया जा रहा है उसके अनुसार 31 दिसंबर 2019 तक वोडाफोन-आइडिया के पास कुल 12,530 करोड़ रुपये नगदी मुद्रा थी जबकि कंपनी पर कुल बकाया राशि 1.03 लाख करोड़ थी। इसी देखते हुए उसे दौरान आदित्य बिरला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने यह तक कह दिया था की यदि इस मामले में सरकार किसी तरह की कोई राहत नहीं देती है तो निश्चित रूप से उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी।
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बताते चलें कि वोडाफोन और आइडिया लगातार पिछले 3 वर्षों से अपने बैलेंसशीट में घाटा दिखा रहे हैं और तो और पिछले साल की सितंबर तिमाही में कंपनी ने कुल 50,922 करोड़ का घाटा दर्ज किया था। निश्चित रूप से यह भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घाटा था। हालाँकि आइडिया वोडाफोन की तुलना में एयरटेल की स्थिति कुछ ठीक जरुर है मगर घटे में वो भी चल रही। दिसंबर में एयरटेल का कैश और बैंक बैलेंस 10206 करोड़ रुपये था, जबकि इसकी कुल देनदारी 1.15 लाख करोड़ रुपये थी।
टेलिकॉम कंपनियों के लिए संकट की घड़ी
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला टेलिकॉम कंपनियों के लिए एक किसी बहुत बड़े झटके से कम नहीं है, कंपनियों को उम्मीद थी कि अदालत की तरफ से शायद कोई रियायत मिल जाए या कोई दूसरा बेहतर रास्ता निकला जा सके मगर ताजा आदेश के बाद टेलिकॉम कंपनियों को ये पैसा दूरसंचार विभाग को जमा करना अनिवार्य हो गया है।

