अलीगढ़ विवि के पूर्व वीसी ने विवादित जमीन को लेकर की चौंकाने वाली टिप्पणी
देश में पिछले 2 महीनों से लगातार राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई 5 अगस्त 2019 से शुरू हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यह 18 अक्टूबर तक चलने वाली है। दोनों पक्षों के वकील लगातार अपने-अपने पक्ष की दलीलें पेश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस की आखिरी तिथि 18 अक्टूबर तक रखी है।
हाल ही में अलीगढ़ विवि के पूर्व वीसी जमीरउद्दीन शाह ने एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दिया है। जिससे वह कट्टरपंथियों के निशाने पर आ सकते हैं। उन्होंने बयान देते हुए कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों के आए तो भी उन्हें बड़ा दिल दिखाते हुए बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन को हिंदुओं को दे देना चाहिए। उन्होंने इस विवाद के शांतिपूर्ण निपटारे की बात कही। जमीरउद्दीन शाह एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल भी हैं।
अलीगढ़ विवि के पूर्व वीसी ने शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की
दरअसल अलीगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी जमीरउद्दीन शाह मुस्लिम तंजीमों के नवगठित छात्र संगठन इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस के बैनर तले भाषण देते हुए अपनी राय रख रहे थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि विवाद पर अपनी राय रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पष्ट होना चाहिए। ताकि इसमें किसी भी तरह का संशय ना हो। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला किसी भी तरह से मुसलमानों के पक्ष में आता है तो वहां पर मस्जिद बनाना बिल्कुल भी संभव नहीं होगा। ऐसे में मुसलमानों को बड़ा दिल दिखाते हुए हिंदुओं को वह जमीन दे देनी चाहिए।
पारित किया गया प्रस्ताव
इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस संगठन के संयोजक कलाम खान ने बताया कि कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में संगठन द्वारा दोनों धर्मों के बीच के इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। हाल ही में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी अदालत के बाहर इसके शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की। शिया वक्फ बोर्ड पहले से ही राम जन्मभूमि बनाने का पक्षधर है।
देश की ताजा खबरों के लिए जुड़े हमारे साथ indiaalive.in पर

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



