17 OBC जातियों को SC में शामिल करने के मामले में योगी सरकार को झटका
सोमवार को योगी सरकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है. दरअसल हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार के 17 अन्य पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने के फैसले पर रोक लगा दिया है.
योगी सरकार ने ये निर्णय इस साल जून के अंत में लिया. प्रदेश के प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने इस बाबत सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करते हुए कहा था कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अब हर जिले में अनुसूचित जाति के प्रमाण-पत्र जारी किए जायेंगे। जिन्हें अनुसूचित जातियों में शामिल किया जा रहा था, वे जातियां थीं- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, माझी और मछुआ.
केंद्र ने भी किया विरोध
थावर चंद गहलोत जो कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री हैं, उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कहा, कि यह निर्णय उचित नहीं है और राज्य सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए। केंद्र की बीजेपी सरकार ने राज्य की योगी सरकार से कहा कि, उनको इस प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए था. क्योंकि अन्य पिछड़ा वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने से समाज कई लोगों पर असर होगा.
क्या थी इस क़दम की वजह?
इस कदम को आदित्यनाथ सरकार द्वारा इन सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को कानूनी अड़चनों को दूर करने के बाद आरक्षण के लाभों के साथ प्रदान करने के प्रयास के रूप में देखा जाता है, जो पिछले समय में इस मुद्दे को रोक दिया था। शेष ओबीसी जाति समूहों के लिए यह कदम ओबीसी कोटा में अधिक स्थान छोड़ देगा।
ये तीसरी बार इस मुद्दे को लेकर किसी राज्य सरकार की कोशिश थी. दरअसल इससे पहले भी ‘सपा सरकार’ और ‘बसपा सरकार’ इन पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने की कोशिश कर चुकीं हैं, पर हर बार कुछ कानूनी दखल के कारणों से ये क़दम मुमकिन नहीं हो पाता.


