खय्याम साहब का निधन,बॉलीवुड में शोक की लहर
92 साल के खय्याम साहब लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लंबे समय से चल रहे इलाज के बाद मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया। मशहूर संगीतकार मोहम्मद खय्याम को अंतिम विदाई दे दी गई है। यह मशहूर संगीतकारों में से एक थे।इन्हें पद्म भूषण सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका था। अंधेरी के चार बंगला कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दे दी गई। रजा मुराद, विशाल भरद्वाज सहित फिल्मी दुनिया की कई बड़ी हस्तियां उनके उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुई।
मशहूर गीतकार के निधन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री सहित बड़ी हस्तियों ने दुख प्रकट किया। इनका पूरा नाम मोहम्मद ज़हूर हाशमी था। इनका जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था। उन्होंने अपनी विशेष संगीत गायकी केबल पर मुंबई में अपना एक अलग मुकाम बनाया।
कैफी आज़मी जैसे शायरों के साथ इन्होंने भारतीय संगीत की दुनिया को कई अनमोल नग्मे दिए।उन्होंने अपनी 90 वीं वर्षगांठ के दौरान कहा कि वह अपनी जिंदगी भर की सारी कमाई ट्रस्ट को दान करना चाहते हैं।उन्होंने कहा था कि जरूरतमंद की खिदमत से बड़ा कोई सौभाग्य नहीं होता है।
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अपने बेहतरीन गानों से याद किए जाएंगे खय्याम साहब
खय्याम साहब के गाए गाने सदा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। इनकी बेहतरीन गायन और लेखन लोगों के दिलों को छूने वाल थ।फिल्म शोला और शबनम से इन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाई।कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, हो या इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं जैसे सदाबहार गीतों ने संगीत की दुनिया को और मूल्यवान बना दिया है। उनकी खास बात यह थी कि वह हर एक फिल्म के लिए काम नहीं किया करते थे। चुनिंदा सब्जेक्ट जो कि उन्हें पसंद हुआ करते थे वह उन्हीं विषयों के लिए काम किया करते थे।
मशहूर गीत-
आशिक हो तो ऐसा हो
चांदनी रात में

