देवनार डंपिंग ग्राउंड: कचरे, जुर्म और जहर की दास्ताँ
अपने २०० सालो की हुकूमत में अंग्रेज़ो ने काफी कुछ किया था, देवनार डंपिंग ग्राउंड उनके कम प्रसिद्ध कामों में से एक है| अंग्रेज़ो ने अपने ज़माने में जब ये इलाका कचरे को फेकने के लिए आरक्षित किया था तब ये जगह निवास के स्थान से काफी दूर हुआ करती थी| आज की तारीख में देवनार डंपिंग ग्राउंड शहर तथा रिहायशी इलाको के बीचो बीच आ गया है|
क्या है देवनार डंपिंग ग्राउंड की दिक्कत?
देवनार डंपिंग ग्राउंड की दिक्कत केवल उसका स्थान नहीं है अपितु उससे उत्पन होने वाली असंख्य दुष्परिणाम है| इस डंपिंग ग्राउंड को कायदे से सालों पहले ही बंद कर दिया जाना चाहिए था| वजह सीधी सी ये है की यहाँ कचरा इतना ज़्यादा जमा हो चूका है की वो केवल नुकसान ही पहुंचा सकता है| देवनार डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरा २० मंजिला ईमारत जितनी ऊंचाई का हो चूका है| हालत काबू से बहार है ये तो केवल कचरे के ढेर की उचाई देख के समझ आ जाता है|

ये कचरा सूखे, गीले, recyclable या फिर खतरनाक किसी भी श्रेड़ी में विभाजित नहीं है और इसलिए इससे जूझना और भी मुश्किल और खतरनाक है| आस पास रहने वालों ने BMC से शिकायत तो कई बार की है परन्तु कोई हल नहीं निकला है|
मुंबई की हवा को जेह्रीला बनती देवनार की आग
अचरज की बात ये है की सेवनार डंपिंग ग्राउंड से होने वाली सबसे बड़ी दिक्कत कचरे से होने वाली असंख्य बीमारिया नहीं है| इन असंख्य बीमारियों से बड़ी एक दिक्कत है आग की| देवनार डंपिंग ग्राउंड में औसतन हर दो हफ्ते एक आग लगती ही लगती है| इन आग से उठने वाला धुआं शहर तो एक दम घोटने वाले यंत्र में तब्दील करता जा रहा है|
देवनारदृम्पिंग ग्राउंड की सबसे बड़ी आग ८ दिनों तक लगातार भभकती रही थी| इस दौरान उठने वाले धुए ने स्थिति काबू से बहार कर दी थी| इस दौरान मुंबई शहर के ऊपर मंडराते स्मोग इतना घाना था की उसकी तस्वीर नासा के एक विमान ने अंतरिक्ष से जारी की थी| इन ८ दिनों में आग पर काबू पाने के लिए दमकल कर्मचारियों ने १४.४ लाख लीटर पानी इस्तेमाल किया था| यहाँ पर हमें ये ध्यान रखना होगा की ये साड़ी घटना महाराष्ट्र राज्य की है जहा हर साल कई किसान सूखे की बहुत कड़ी मार झेलते हैं और अपनी जान दे बैठते हैं| इसी राज्य में १४.४ लाख लीटर पानी की बर्बादी हुई क्यूंकि एक कचरे का ढेर हमारे काबू से बहार निकल गया|

देवनार डंपिंग ग्राउंड् में बार बार लगने वाली आग एक प्रमुख कारण है मुंबई शहर के ख़राब हो रहे हवा के स्तर के पीछे| इन आग के चलते उठने वाला विषाक्त धुंआ एक मुख्या कारण है आँख, नाक, गले तथा त्वचा पे होने वाली जलन का| लेकिन ये सारी समस्याएं छोटी तब मालूम होती जब हमें ये पता चलता है की कचरे में लगी आग से उठने वाला विषैला धुंए से टीबी, अस्थमा तथा कैंसर जैसी बीमारिया होती हैं|
कचरे की आग के पीछे का व्यवस्थित अपराध
देवनार डंपिंग ग्राउंड की दिकत्तों ख़ास कर रोज़ाना लगने वाली आग का सीधा समाधान है उसे बंद करके नया डंपिंग ग्राउंड खोलना| समस्या इससे थोड़ी ज़्यादा जटिल है| बीते कुछ समय में ये बात सामने आयी है की यहाँ लगने वाली आग अपने आप या फिर प्राकृतिक कारणों से नहीं लगती हैं| देवनार डंपिंग ग्राउंड में आग जान बूझ के लगायी जाती है|

“कचरा गैंग” नमक एक स्थानीय गिरोह व्यवस्थित ढंग से इन आगों को सुनिश्चित करता है| ये गिरोह कूड़ा बिनने वालो को कुछ रकम देता है एक आग चालू करने के लिए| ये गिरोह ऐसा करता है ताकी कचरे में से वो धातु अथवा “मेटल” आसानी से निकाल सके| ये गिरोह फिर इन धातुओं को अवैध तरीके से बेचता है|
कचरा गैंग की इन अवैध हरकतों पर न किसी की निगाह है और न इन पर कोई बड़ी करवाई कभी होती है|
कचरे के इस अत्यंत विशाल ढेर पे वे आग लगवाते हैं जिससे सैकड़ो जाने खतरे में पड़ती हैं और फिर बचे हुए धातु को अवैध रूप से बेच कर अमीर होते हैं|
“सेक्रेड गेम्स ” में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी साहब के किरदार ने जब कहा था की “मुंबई का खज़ाना उसके कचरे के ढेर में है” तो शायद सही ही कहा था|
निष्कर्ष
देवनार डंपिंग ग्राउंड की कहाँ केवल एक काबू से बहार गए कचरे के ढेर की कहानी नही है| ये कहानी है व्यवस्थित अपराध की भी| इन दोनों कहानियो के पीछे लेकिन वजह एक ही है और वह है राजनैतिक वर्ग का इसपे हमेशा की तरह कोई जिम्मेदारी नही लेना| शिव सेना भारतीय जनता पार्टी को कोसती है, भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को कोसती, आम आदमी पार्टी हर पार्टी को कोसती आई और इन सब में फस कर विषाक्त जगह पर अपनी जिंदगी गुज़र रहा है एक आम आदमी|
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