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अमेरिका तय करेगा ईरान से तेल आयात का भविष्य

भारत ईरान से कच्चे तेलों का आयात करता है । कच्चे तेलों को लेकर बड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है । नवंबर में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लगने वाले हैं ।  ऐसे में ईरान से तेल का आयात भारत करेगा या नहीं इसका फैसला अमेरिका से बातचीत होने के बाद किया जाएगा ।
 गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ने की वजह से ईरान से तेल आयात पर अमेरिकी बैन की तारीख नजदीक आने पर पीएम ने तेल सेक्टर्स के साथ एक मीटिंग की । जिसमें पेट्रोलियम विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय भी शामिल हुआ ।  इस मीटिंग का प्रमुख उद्देश्य था कि देश में गैस और तेल के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जाए वही तेल कंपनियों पर बोझ ना पड़े इस बारे में भी चर्चा की जाए ।ईरान से
मीटिंग के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर भी चर्चा की कि ईरान पर  नवंबर में प्रतिबंध लग जाएगा । प्रतिबंध लगने के बाद ईरान से कच्चे तेल को आयात को किस तरह से जारी रखा जा सकता है । प्रतिबंध लगाने के बाद ईरान में कैसे हालात हो सकते हैं तथा भारत और ईरान के बीच तेल आयात को लेकर किस प्रकार के संबंध हो सकते हैं । मीटिंग के बाद सभी लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ही कच्चे तेल के आयात  पर कोई फैसला लिया जाएगा ।  इसके साथ यह कोशिश रहेगी कि ईरान के साथ तेल आयात को जारी रखा जाए ।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कच्चे तेल के आयातो को लेकर हमारी नीतियां पूरी तरह से स्पष्ट है । उन्होंने बताया कि 4 नवंबर के बाद ईरान से तेल आयात जारी रखने व हवाई रक्षा प्रणाली एस 400 को रूस के द्वारा खरीदने से हम भारत के लिए किसी भी प्रकार की समीक्षा बहुत ही सावधानीपूर्वक करेंगे । उन्होंने यह भी बताया कि आने वाला समय भारत देश के लिए हवाई रक्षा प्रणाली एस 400 और कच्चे तेल को लेकर बहुत अच्छा नहीं है ।
 गौरतलब है कि अमेरिका ईरान से तेल निर्यात को पूरी तरह से रोकना चाहता है । अमेरिका ने 2015 में बहुपक्षीय समझौते से बाहर आने के फैसले के बाद ही ईरान से तेल खरीद पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया था ।

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