850 महिलाओं और बच्चों को मानव तस्करी के चंगुल से बचाया
दुनिया में मिसालें उन्हीं की दी जाती हैं, जो खुद की जिंदगी की परवाह किए बगैर दूसरों की जिंदगी संवारते हैं। सिलीगुड़ी की रंगु सोरया ऐसी ही बहादुर शख्सियत हैं, जिन्होंने प्रतिकूल हालातों के बावजूद बहुत सी महिलाओं की जिंदगी को नर्क होने से बचाया है। जान जोखिम में डालकर उन्होंने करीब 850 महिलाओं और बच्चों को मानव तस्करों से मुक्त कराया है। साहस का दूसरा नाम बन चुकीं रंगु को इस नेक और मुश्किल काम के लिए गॉडफ्रे फिलिप्स नेशनल ब्रेवरी अवार्ड समेत कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
दार्जिलिंग सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने वाली रंगु की प्रेरणा रहीं उनकी मां स्व. इति सोरया। वे पानीघटा नामक छोटे से गांव में सामाजिक कार्य करती थीं, जहां आए दिन घर के सदस्यों या बाहरी लोगों द्वारा किसी न किसी रूप में महिलाओं का शोषण होता था। कभी शादी तो कभी काम का झांसा देकर महिला और बच्चों की तस्करी की खबरें सुनने को मिलती थी। तभी रंगु ने तय कर लिया कि उनकी जिंदगी का मकसद महिला उद्धार होगा।

