वृद्धाश्रम में रह रहा है भारतीय लोकतन्त्र की तकदीर बदलने वाला यह शक्स
आपने टीएन शेषन का नाम अवश्य ही सुना होगा। टीएन शेषन ने भारतीय चुनाव आयोग को न केवल प्रभावी बनाया बल्कि चुनावी प्रक्रिया को भी निष्पक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तमिलनाडू काडर के आईएएस ऑफिसर रहे टीएन शेषन जब मुख्य चुनाव आयुक्त बने तो निष्पक्ष चुनाव करना एक बड़ी चुनौती थी। चुनाव आयोग को सरकारी और राजनैतिक तंत्र के सामने निष्प्रभावी माना जाता था। शेषन के पद संभालने के बाद शेषन किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में नहीं रहे और हमेशा से ही निष्पक्ष चुनाव कराने के एजेंडे पर काम करते रहे।
90 के दशकों में चुनावों में हिंसा का बोलबाला था। ऐसे समय में निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती थी। खासकर बिहार में निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी। बिहार में चुनाव के दौरान हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और कई तरह के गड़बड़ियों के मामले सामने आते थे। टीएन शेषन ने इसे चुनौती को लेते हुए चुनाव आयोग की रणनीति बदली और बदली हुई रणनीति के तहत बिहार में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी कराई।
यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। रिटायरमेंट के बाद टीएन शेषन ने राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा। वर्तमान में 85 साल के शेषन सत्य साईं बाबा के भक्त रहे हैं। साईं बाबा की देहांत 2011 में होने के बाद श्री शेषन टूट और सदमे में चले गए थे। करीबी रिशतेदारों के अनुसार, इस सदमे के बाद उन्हें भूलने की बीमारी हो गई थी। इसके बाद उन्हे चेन्नई के एक बड़े वृद्धाश्रम ‘एसएसम रेजिडेंसी’ में भर्ती करवा दिया गया। वहाँ तीन साल रहने के बाद टीएन शेषन सामान्य होने के बाद अपने फ्लैट में रहने आ गए। लेकिन अभी भी कभी कभी अस्वस्थ होने पर पूर्व चुनाव आयुक्त वृद्धाश्रम में रहने चले जाते हैं।

