मुर्गीपालन से गांव को समृद्ध बना रही गरीब महिलायें
गांवों में महिलाओं को अक्सर चौका- चूल्हा तक सीमित कर दिया जाता है। चौगाईं की महिलाएं इस धारणा को तोड़ रही हैं। उन्होंने स्वरोजगार के लिए सामूहिक प्रयत्न की मिसाल पेश की है। दर्जनों महिलाएं समूह में कुक्कुट पालन कर गरीबी को पीछे धकेल परिवार की जिंदगी संवार रहीं हैं।
चौगाईं महादलित टोले के ज्यादातर लोग मजदूरी में लगे थे। किसी तरह दो जून की रोटी का जुगाड़ होता था। मजदूरी कर परिवार चलाने वालों के सामने कई बार भूखमरी की नौबत आ जाती थी। एक कमाने वाले और परिवार में कई लोग खाने वाले थे। महिलाओं की पहल पर 2014 में जीविका से जुड़े कुछ लोग गांव में आए और उन्हें सामूहिक कुक्कुट पालन के लिए प्रेरित किया। समूह की हर महिला को बीस मुर्गियां दी गईं। यहीं से सफलता की कहानी प्रारंभ हुई।
बस्ती की मालती देवी, रानी देवी, अनिता देवी, ललियां देवी, तेतरी देवी तथा सोना देवी बताती हैं कि आर्थिक तंगी दूर करने के लिए कुछ काम का विचार मन में था। मुर्गी पालन का काम उपयुक्त लगा। जीविका ने हमारा मार्गदर्शन किया और आवश्यक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के बाद बाजार भी उपलब्ध कराया गया। आज समूह की हर महिला कुक्कुट पालन कर कम से कम चार हजार रुपये महीने कमा लेती है।

