भारत का विदेशी ऋण 3% घटकर 472 अरब डॉलर हुआ
भारत का विदेशी ऋण 13.1 अरब डॉलर यानी 2.7% घटकर 471.9 अरब डॉलर रह गया है. यह आंकड़ा मार्च 2017 तक का है. इसके पीछे प्रमुख वजह प्रवासी भारतीय जमा और वाणिज्यिक कर्ज उठाव में गिरावट आना है. आर्थिक मामलों के विभाग की एक रपट ‘भारत का विदेशी ऋण : वित्त वर्ष 2016-17 की स्थिति रपट’ में कहा गया है कि 2015-16 के मुकाबले 2016-17 में हालत बेहतर हुए हैं और ऋण प्रबंधन सीमाओं के तहत बना हुआ है.
मार्च 2017 की समाप्ति पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और विदेशी ऋण का अनुपात घटकर 20.2% रह गया है जो मार्च 2016 की समाप्ति पर 23.5% था.
मार्च 2017 की समाप्ति पर दीर्घावधि विदेशी ऋण 383.9 अरब डालर रहा है जो पिछले साल के मुकाबले 4.4% कम है. समीक्षावधि में कुल विदेशी ऋण का 81.4% दीर्घावधि विदेशी ऋण है. इस अवधि में लघु अवधि विदेशी ऋण 5.5% बढ़कर 88 अरब डॉलर हो गया.

