भारतीय बने और दयालु, ‘वर्ल्ड गिविंग इंडेक्स’ में सुधरी रैंकिंग
विपत्ति या कठिन दौर में किसी की मदद करने की भारतीयों की आदत में सुधार दर्ज हुआ है। विश्व के अन्य देशों की तुलना में उनकी दयालुता में बढ़ोत्तरी हुई है। ‘वर्ल्ड गिविंग इंडेक्स-2017 में में भारत का स्थान 91 से सुधरकर 81 हो गया है। यह इंडेक्स चैरिटीज एड फाउंडेशन (सीएएफ) द्वारा तैयार किया जाता है। फाउंडेशन दुनियाभर के देशों के लोगों की दानशीलता का सर्वे कर रैंक देता है। सर्वे में पाया गया है कि अफ्रीका को छोड़ सभी महाद्वीपों में दान देने की प्रवृत्ति घटी है, जबकि अफ्रीका में इसमें सकारात्मक बदलाव आया है।
लंदन स्थित इस फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार ने लगातार चौथे वर्ष विश्व के सबसे दयालु देश का ताज बरकरार रखा है। उसने नाम पहले नंबर पर रखने में कामयाबी पाई, लेकिन उसका भी समग्र स्कोर 70 से घटकर 65 हो गया। अफ्रीका एकमात्र ऐसा महाद्वीप रहा, जिसने इस सूचकांक के तीनों मानदंडों में सुधार दर्ज किया है।
-देश के कितने लोग पैसा दान करते हैं?
-कितने लोग स्वेच्छा से समय देते हैं?
-कितने लोग भिखारियों की मदद करते हैं?
139 देशों देशों में सर्वे: सीएएफ ने विश्व के 139 देशों में 1 लाख 46 हजार लोगों से साक्षात्कार कर यह सर्वे किया है। अफ्रीका के मुकाबले एशिया तीनों मानकों पर नीचे आया।
1.एशिया में पैसा दान करने वालों की संख्या 37 से घटकर 33 फीसदी हुई।
2.भिखारी की मदद करने की प्रवृत्ति 51 से घटकर 47 फीसदी हुई।
3.स्वेच्छा से समयदानियों की संख्या भी घटकर 21 फीसदी हो गई।
जी-20 के सिर्फ 6 देश
लंदन मूल के इस फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार जी-20 में से सिर्फ 6 देश डब्ल्यूजीआई में स्थान पा सके हैं। इंडेक्स में इसके सभी सदस्य देशों के अंकों में गिरावट आई है। बता दें कि सीएएफ हर साल 50 करो़ड़ पाउंड (4150 करो़ड़ रुपये) दान करता है। वह 2010 से यह इंडेक्स तैयार कर रहा है, ताकि ब्रिटेन व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दयालुता की क्या स्थिति है, यह पता लगाया जा सके।

