कविता शायरी 

पर बचपना नही देखा है!!

रोज सवेरे उठकर,

उसे काम पे जाते देखा है।

नन्हे से कन्धों पर,

उसे बोझ ले जाते देखा है।

 

जिंदगी की भागदौड़ में,

उसके रोज ही गिरते देखा है

उन नन्हा से कदमों को,

नंगे पाँव ही चलते देखा है।

 

छोटी-छोटी बातों पे,

दिल खोलकर हँसना देखा है।

उस प्यारी सी मुस्कान में,

कुछ दर्द छुपाते देखा है।

 

उस छोटी सी उमर में,

परिपक्वता को देखा है।

भूखे पेट सोकर,

उसे अपनी बदनसीबी से लड़ते देखा है

 

आज ग़रीबों की नगरी में जा,

ज़िन्दगी के दूसरे पहलू को देखा है।

आज बच्चे तो देखे,

पर बचपना नही देखा है।

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3 Thoughts to “पर बचपना नही देखा है!!”

  1. Umang kaler

    Heart touching ❤️

  2. Jivnesh tyagi

    Wowww Kya baat h yr ?????

  3. Sonam Kharwar

    Thank you Umang and jivnesh..!!??

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