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कैसे एक शुद्ध देशी भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम ने माइक्रोसॉफ़्ट और एपल को पछाड़ा

क्या आपको पता है कि भारत में आंड्रोइड ऑपरेटिंग सिस्टम के बाद किस मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का नंबर आता है? अगर आपका अनुमान एपल या विंडोज है तो आप गलत हैं। हाँ जी, आंड्रोइड के बाद भारत में इंडस ऑपरेटिंग सिस्टम ही सबसे ज्यादा प्रचलित है। वर्तमान में 1 करोड़ फोन इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं। इंडस ऑपरेटिंग सिस्टम, पहली बार स्मार्ट फोन प्रयोग करने वाले लोगों कि पहली पसंद है। अब यह भारत के आठ मोबाइल ब्राण्ड में चलता है जिसमें से माइक्रोमैक्स, कार्बोन आदि प्रमुख हैं।

पवई, मुंबई के आईआईटी बॉम्बे से पढे आकाश डोंगरे, सुधीर और राकेश देशमुख ने वर्षों के रिसर्च के बाद वर्ष 2012 में इसे लॉंच किया। तब से आज तक यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह अँग्रेजी के साथ साथ 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का अपना ऐप्प स्टोर भी है जो 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसके संस्थापक राकेश देशमुख के अनुसार यह ऑपरेटिंग सिस्टम दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में ज्यादा लोकप्रिय है।

प्रयोगिक दौर में संस्थापकों ने जब गुजरात के सौराष्ट्र में गुजराती भाषा में इंडस ओएस का अनुप्रयोग कर रहे थे तो उन्हें लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इससे प्रोत्साहित हो कर उन्होने अन्य भारतीय भाषाओं में भी इंडस ऑपरेटिंग सिस्टम को बनाया। इंडस की टीम ने 2014 में तत्कालीन सबसे बड़े भारतीय ब्रांड माइक्रोमैक्स के साथ अनुबंध किया। मई 2015 में इंडस ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला फोन माइक्रोमैक्स युनाइट-3 बाजार में लॉंच हुआ। इसे अनुमान से भी ज्यादा सफलता मिली और मात्र 17 दिनों में ही 75,000 ग्राहक मिल गए। यह इंडस ओएस का ही कमाल है कि आज भी 10000 रु से कम की श्रेणी में युनाइट-3 की बिक्री सबसे अधिक है।

आज जब लगभग सभी फोन भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं, फिर भी इंडस ऑपरेटिंग सिस्टम उनसे अधिक उपयोगी है। इसमें साधारण अनुवाद और UI तक ही भाषा सीमित नहीं है, बल्कि पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम ही उसी भाषा में है। इंडस की टीम अब बड़ी हो चुकी है और संस्थापक इसे और उच्च स्तर तक ले जाना चाहते हैं।

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