‘मैंने ऐसा कभी नहीं कहा था’ अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा?
गृह मंत्री अमित शाह आज कल कुछ ज्यादा ही चर्चा में हैं. पिछले दिनों उनका ‘अग्रेशन’ वाला डायलाग चर्चा में था और अब फिर से उनका एक डायलाग काफी चर्चा में है. दरअसल अमित शाह ने 14 सितम्बर यानी हिंदी दिवस एक बयान दिया. बयान में अमित शाह ने ये कहा, कि पूरे देश में हिंदी एक आम भाषा हो. फिर क्या हर बार की तरह इस बात पर भी सोशल मीडिया में बवाल मच गया. लोग इस बाट के पक्ष और विपक्ष में अपना –अपना नजरिया रखने लगे.
14 सितम्बर को अमित शाह ने ट्विटर पर एक पोस्ट किया. उस पोस्ट में हिंदी दिवस के आयोजन की विज्ञान भवन की तस्वीरें. अमित शाह ने लिखा, ‘भारत की अनेक भाषाएं और बोलियां हमारी सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन देश की एक भाषा ऐसी हो, जिससे विदेशी भाषाएं हमारे देश पर हावी ना हों इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने एकमत से हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया.’ इस ट्वीट के बाद अमित शाह का जमकर विरोध हुआ, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में.
किसने क्या टिप्पणी की:
एक्टर कमल हासन ने एक विडियो जारी कर अमित शाह के इस बयान का विरोध किया है. उन्होंने कहा, ‘जब भारत लोकतंत्र बना था, तो अनेकता में एकता का का हमने वडा किया था. और अब कोई भी इसे तोड़ नहीं सकता. हम हर भाषा की इज्ज़त करते हैं पर हमारी मातृभाषा तमिल ही रहेगी. जल्ली कट्टू एक प्रदर्शन था, पर भाषा को लेकर लड़ाई गर लड़ाई हुई तो वो कहीं ज्यादा बड़ी होगी. भारत में ऐसी किसी लड़ाई की ज़रूरत नहीं है.’ और उन्होंने आगे ये भी कहा, कि राष्ट्रगान बंगाली भाषा में लिखा गया है, और हम सभी भारतवासी इसे ख़ुशी से गाते हैं. क्योंकि ये हमारी सभी भाषाओँ और सभी राज्यों का सम्मान करता है. सबको साथ लेकर चलने वाले भारत अलग को मत बनाओ.
18 सितम्बर को एक्टर रजनीकान्त ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए कहा, ‘भारत में एक आम भाषा की संकल्पना ‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से संभव नहीं है.’
अमित शाह का नया बयान:
‘मैंने कभी नहीं कहा कि हिंदी को दूसरी आंचलिक भाषाओं पर थोपा जाना चाहिए. मैंने बस इतना निवेदन किया था कि लोग अपनी मातृभाषा से अलग हिंदी को दूसरी भाषा के तौर पर सीखें.’ मैं खुद गैर हिंदी भाषी प्रदेश से आता हूँ. अब अगर लोग इसपर राजनीति करना चाहते हैं, तो ये उनका चुनाव है.


