दरिंदों की हैवानियत की गूंज संसद तक
आज संसद के शीतकालीन सत्र का 11वां दिन है। हैदराबाद में गैंगरेप के बाद डॉक्टर की हत्या की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सोमवार को संसद में भी दरिंदों की हैवानियत का मामला गूंजता रहा। सोमवार को यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में उठा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति वैंकैया नायडू ने भी देश में घट रहीं ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है।
राज्यसभा में इस पर चर्चा जारी है। इस दौरान ऐसे मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई अनिवार्य करने, अपराधियों के बंध्याकरण की भी मांग उठी है। सांसद जया बच्चन ने तो संसद में यहां तक कह दिया कि ऐसे लोगों को भीड़ के हवाले कर देना चाहिए था, वो ही इनके साथ न्याय करती।
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वहीं राज्यसभा स्पीकर वेंकैया नायडू ने कहा कि यह एक सामाजिक विकृति है। फास्ट ट्रैक इसका समाधान है लेकिन उसके बाद की प्रक्रिया का क्या? इस तरह के जघन्य अपराध से निपटने के लिए केवल कानून से ही नहीं बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने उम्र को लेकर सबको विचार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई लोग जो कहते हैं कि अपराधी नाबालिक है। उन्हें जरा यह सोचना चाहिए कि जो दुष्कृत्य कर सकता है उसकी उम्र से क्या लेना- देना है। वहीं एआईएडीएमके कि सांसद विजिला सत्यानंद चर्चा के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि देश बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहा। साथ ही लोकसभा में सदन के उपनेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को फांसी दिलाने के लिए कानून को और सख्त करने के लिए तैयार है।

आज सदन में पूरे समय दरिंदों के हैवानियत की गूंज सुनाई देती रही।

