जुर्माना घटाने में राज्यों की नहीं चलेगी मनमानी
राज्य सरकारों को मोटर एक्ट के तहत कंपाउंडेबल अपराधों में जुर्माना घटाने का मनमाना अधिकार नहीं मिल सकता है। राज्य में मोटर अपराध से संबंधित दुर्घटनाओं के संख्याओं पर राज्यों के लिए यह अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे। यदि किसी राज्य में विशेष तरह की सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती नजर आ रही है तो उस पर जुर्माना कम नहीं किया जाएगा। जुर्माना घटाने से पहले राज्यों के हादसों का ग्राफ देखना आवश्यक है।

राज्य केवल उन्ही उल्लघनों में जुर्माना कम कर सकते हैं जिनमें हादसों का ग्राफ नीचे गिर रहा हो। यह राय विधि मंत्रालय ने मोटर एक्ट पर जुर्माना घटाने के राज्यों के अधिकार के कारण सड़क परिवहन मंत्रालय को दी है। यह राय गुजरात समेत उन राज्यों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने अपने यहां बड़े जुर्माने को लागू करने से इंकार कर दिया था। गुजरात के अलावा उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल में 1 सितंबर से लागू मोटर एक्ट के बड़े जुर्माने को लागू करने से इंकार कर दिया था।
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इन राज्यों ने कंपाउंडेबल अपराधों में धारा 200 के प्रावधानों के अनुसार कम जुर्माना वसूलने का ऐलान किया था। उत्तर प्रदेश ने भी नए जुर्माना की अधिसूचना जारी करने में आनाकानी का रवैया अपनाया था। कंपाउंडेबल अपराध ऐसे मामलों को कहा जाता है, जिनमें अदालत के बाहर सुलह समझौता किया जा सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के रवैए पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि राज जुर्माना घटा सकते हैं। लेकिन बढ़ती सड़क दुर्घटना को भी ध्यान में रखना होगा जो लगातार बढ़ रही हैं। देश में हर साल पांच लाख दुर्घटनाओं में डेढ़ लाख लोग मारे जाते हैं। हाल ही में आए सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े जिनमें दुर्घटना और मौतों में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।

