ईवीएम को लेकर नहीं बंद हुआ विपक्ष का रोना, फिर जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
ईवीएम को लेकर विपक्ष के दिमाग में उत्पन्न शंका शांत होने का नाम ही नहीं ले रही है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार विपक्ष सत्ता पक्ष द्वारा ईवीएम को हैक करने का आरोप लगा रहा है। हमें लगातार विधानसभा चुनाव में कई राज्यों में यह देखने को मिला। जब विपक्ष ईवीएम से असंतुष्ट नजर आया। शनिवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मिले थे। उसके बाद रविवार को 21 विपक्षी दलों ने 50% ईवीएम और वीवीपैट के मिलान के लिए एकजुट होकर दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
इसके पहले विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में 50% ईवीएम और वीवीपैट के मिलान के लिए याचिका दायर की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट राजी नहीं हुआ था और उसने कहा था कि प्रत्येक विधानसभा में 5 पोलिंग बूथों पर ईवीएम और वीवी पैट का मिलान करवाया जाएगा। वर्तमान समय में केवल 1 विधानसभा में 1 पोलिंग बूथ पर वीवीपैट और ईवीएम का मिलान करवाया जाता है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि वर्तमान के चुनावी ढांचे में 50% ईवीएम और वीवीपैट के पर्चियां का मिलान संभव नहीं है। इसके लिए बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ेगी और चुनाव परिणाम आने में काफी देरी लग सकती है। याचिका पर उन्होंने यह फैसला दिया था कि अब से लोकसभा चुनाव में 1 विधानसभा में 5 पोलिंग बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान होगा जो कि अब तक 1 विधानसभा में एक ही पोलिंग बूथ पर होता था।
कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा है कि देश में 50% ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान के लिए वह देशभर में लोगों की राय को बदलने के लिए विस्तृत स्तर पर अभियान चलाएगी। इस दौरान विपक्ष के कई बड़े नेता अरविंद केजरीवाल ,एम के स्टालिन, फारुख अब्दुल्ला,अजीत सिंह ,बदरुद्दीन ,कुमार दानिश अली के साथ-साथ विपक्ष के कई बड़े दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
विपक्ष द्वारा ईवीएम पर एक बार फिर से प्रश्न खड़ा करने का जो प्रयास किया जा रहा है वह गैर जिम्मेदाराना है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



